





Thar पोस्ट न्यूज। बीकानेर में आज सभी ज्योतिषी, तपस्वी, मनस्वी, विद्याकंठक, पंचागकर्ता एक जाजम पर बैठे और दीपावली तिथि की भ्रम की स्थिति को दूर किया। सभी ने एक मंच पर मंथन करने के साथ बताया कि दीपावली 20 को ही है। मुरलीधर व्यास नगर रोड पर गोकुल सर्किल के पास भाल चंद्र जी गणेश मंदिर में बीकानेर विद्धत परिषद का गठन किया गया। जिसकी पहली बैठक गुरूवार को किराडू बगेची में हुई। बैठक मेें दीपावली पर्व मनाने के विषय पर विद्वानजनों ने मंथन किया। सभा में नगर के प्रमुख आचार्यगण, पंडितगण एवं संस्कृतप्रेमी सहभागी बनें। कार्यक्रम का उद्देश्य पंचांगीय गणना एवं वैदिक मान्यताओं के आधार पर दीपावली पर्व की यथार्थ तिथि पर प्रकाश डाला और तय किया कि 20 अक्टूबर को ही दीपावली पर्व शास्त्र सम्मत है। उपस्थित सभी विद्वानों ने अधो लिखित शास्त्रीय प्रमाणों के आधार पर दीपावली 20 अक्टूबर को शास्त्र सम्मत है। सभी का मानना था कि दीपावली का मुख्य कर्म काल प्रदोष काल है,जो कि 20 अक्टूबर को ही प्राप्त हो रहा है। 20 अक्टूबर को अमावस्या दोपहर 3 बजकर 18 मिनट से प्रारम्भ होंगी जो 21 अक्टूबर को सायं 4 बजकर 48 मिनट तक रहेगी। 21 अक्टूबर को प्रदोष काल में अमावस्या नहीं होने के कारण 20 अक्टूबर को दीपावली पर्व मनाना शास्त्र सम्मत है। जहां प्रदोष काल के समय अमावस्या प्राप्त हो रही है उन प्रान्तों में 21 अक्टूबर को भी दीपावली पर्व मनाया जायेगा। क्योंकि पूर्वी राज्यो में सूर्योदय के समय अलग है।





मंथन सभा में ये हुए शामिल
इस अवसर पर पं नथमल पुरोहित, पुजारी बाबा, मम्मू महाराज, डॉ गोपाल नारायण व्यास, सुशील किराडू, राजेन्द्र किराडू, अशोक किराडू, अशोक ओझा, योगेश बिस्सा, ब्रजेश्वर व्यास योगेश ओझा, आदित्य आचार्य माध्यन्दिन, डॉ योगेश व्यास, मांगीलाल भोजक, गायत्री प्रसाद, यज्ञ प्रसाद शर्मा आदि गणमान्य विद्वानजन ज्योतिष, धर्मशास्त्र एवं परंपरागत मतों के आधार पर 20 अक्टूबर को दीपावली मनाने के औचित्य पर अपने विचार प्रकट किये। कार्यक्रम के अंत में सर्वसम्मति से निर्णय लेकर जनता से अनुरोध किया कि वे वैदिक परंपरा के अनुसार दीपावली मनाएं।
ये रहेगा परिषद का उदेद्श्य
कार्यक्रम के संचालक नानू महाराज किराडू ने बताया काशी विद्वत परिषद् की तर्ज पर बीकानेर विद्वत परिषद् की स्थापना की गई है। जिसमे बीकानेर के ज्योतिषी,पंचाग के गणितज्ञ,धर्म-शास्त्र का ज्ञान रखने वाले गुणीजन सम्मिलित रहेंगे। जो भविष्य मे किसी भी तीज,पर्व, त्यौहार व्रत आदि का ये परिषद् अपना शास्त्र सम्मत निर्णय देंगे। ताकि किसी प्रकार से कोई तीज त्योहार दो न मनाएं जाएं।