





Thar पोस्ट न्यूज बीकानेर। अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ (उच्च शिक्षा) राजस्थान स्थानीय इकाई राजकीय डूंगर महाविद्यालय में गुरु पूर्णिमा के उपलक्ष्य में 12 जुलाई, शनिवार को गुरु वंदन कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम राजकीय महाविद्यालय के प्रताप सभागार में महर्षि वेदव्यास के चित्र के समक्ष पुष्पांजलि अर्पण से शुरु हुआ। मुख्य अतिथि के रूप में स्वामी विमर्शानंद सरस्वती ने भारतीय गुरु परंपरा के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि गुरु मानव का निर्माता होता है। गुरु को आचार्य भी कहते है। अतः ज्ञान प्रदान करने के साथ-साथ भावी पीढ़ी में संस्कृति और संस्कारों का भी निर्माण हो इस प्रकार का आचरण करना चाहिए। जिस प्रकार कुंभकार घड़े का निर्माण करता है। उसी प्रकार शिक्षक निर्माता की भूमिका निभाता है, और विद्यार्थी कच्चे घड़े की तरह होते हैं हम जैसा उनको बनाना चाहते हैं वैसा बन सकते हैं।





वे हमारे आचरण से सीखते हैं अतः हमें आचरण पर विशेष ध्यान देना चाहिए। गुरु को शिष्यों का निर्माण करते हुए उनका पथ प्रदर्शक होना चाहिए। गुरु को शिष्यों में अंतर्निहित शक्ति को विकसित करने का कार्य करना चाहिए, कार्यक्रम की प्रस्तावना प्रस्तुत करते हुए डॉ शशिकांत वर्मा ने बताया कि गुरुओं का कर्तव्य शिक्षा के माध्यम से समाज का निर्माण करना है, शिक्षकों को समाज में समागत समस्याओं के समाधान का प्रयास करना चाहिए।
गुरु वन्दन कार्यक्रम का संचालन करते हुए डॉ मातृदत शर्मा ने आगंतुकों का स्वागत किया। कार्यक्रम के अंत में सफल आयोजन के लिए राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ (उच्च शिक्षा) इकाई सचिव डॉ मधुसूदन शर्मा ने सबका आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर महाविद्यालय के सभी संकायों के आचार्य, सह आचार्य, सहायक आचार्य, विभिन्न संस्थाओं के पदाधिकारी तथा गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।