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IMG 20201023 WA0138 गुरु जांभोजी महान् समाज सुधारक थे, उनके उपदेश आज भी प्रासंगिक- डाॅ. कल्ला Rajasthan News Portal बीकानेर अपडेट
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Tp न्यूज़। कला, साहित्य एवं संस्कृति मंत्री डाॅ. बुलाकीदास कल्ला ने कहा कि गुरु जांभोजी महान् समाज सुधारक थे। उनके उपदेश सार्वभौमिक सत्य को उद्घाटित करने वाले हैं। गुरु जांभोजी के महान् व्यक्तित्व, प्रेरणास्पद कर्मठ जीवन व लोक मंगलकारी वृत्ति से आज भी लाखों लोग प्रेरित हो रहे हैं। उनकी ‘सबदवाणी’ का मूल संदेश आज भी उतना ही प्रासंगिक और उपादेय है।       डाॅ. कल्ला शुक्रवार को जयपुर में अपने निवास पर राजस्थानी भाषा, साहित्य एवं संस्कृति अकादमी की मुखपत्रिका ‘जागती जोत’ के गुरु जांभोजी के जीवन-दर्शन पर आधारित विशेषांक का ऑनलाइन विमोचन कर रहे थे। डाॅ. कल्ला ने कहा कि बिश्नोई पंथ की स्थापना करने वाले गुरु जांभोजी ने सैंकड़ों वर्ष पूर्व वन, वन्य जीव व पर्यावरण संरक्षण का अनुकरणीय संदेश दिया था। उन्होंने समाज में फैली कुरीतियों को दूर करने व स्वस्थ जीवन शैली के लिए 29 नियम बनाए थे। डाॅ. कल्ला ने कहा कि विशेष रूप से युवा पीढ़ी को ऐसे विशेषांकों के माध्यम से महापुरुषों के जीवन-दर्शन की जानकारी मिलेगी तथा वे इनके जीवन से प्रेरणा लेकर राष्ट्रहित में कार्य कर सकेंगे।       
        कला, साहित्य, संस्कृति मंत्री ने बताया कि राज्य सरकार प्रदेश में पर्यावरण संरक्षण के लिए ‘राज्य पर्यावरण योजना’ व हर जिले के लिए ‘जिला पर्यावरण योजना’ बना रही है। अमृतादेवी की स्मृति में खेजड़ली शहीद स्मारक का निर्माण होगा। उन्होंने बताया कि कोरोना के कारण कठिन परिस्थितियों का सामना कर रहे ग्रामीण क्षेत्रों के लोक कलाकारों की सहायता के लिए कला, साहित्य एवं संस्कृति विभाग द्वारा ‘मुख्यमंत्री लोक कलाकार प्रोत्साहन योजना’ लागू कर अनूठी पहल की गई है। साथ ही एक नवाचार के रूप में विभाग द्वारा प्रदेश के कलाकारों से संबंधित सूचना संग्रहण के लिए एक ऑनलाइन डाटाबेस तैयार किया जाएगा।
       डाॅ. कल्ला ने कहा कि राजस्थानी भाषा, साहित्य एवं संस्कृति का व्यापक प्रचार-प्रसार हो, इसके लिए पूर्ण गंभीरता से प्रयास किए जाएं। उन्होंने आग्रह किया कि कोरोना वायरस से बचाव व रोकथाम हेतु राज्य सरकार द्वारा जो दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं, उनकी पालना सुनिश्चित हो।
       अकादमी सचिव शरद केवलिया ने बताया कि जागती जोत के “गुरु जांभोजी विशेषांक” में लगभग 150 पृष्ठों में देश के 35 लब्धप्रतिष्ठ साहित्यकारों के शोधपरक आलेख, कविताएं, दोहे, हाईकू, गीत सम्मिलित हैं। इसके साथ ही इसमें प्रदेश की साहित्यिक, सांस्कृतिक गतिविधियों के राजस्थानी समाचार भी सम्मिलित किए गए हैं।उल्लेखनीय है कि इस विशेषांक के प्रधान संपादक अध्यक्ष एवं संभागीय आयुक्त भंवरलाल मेहरा, संपादक शिवराज छंगाणी, संपादन सहयोग डाॅ. कृष्णलाल बिश्नोई व प्रबंध संपादक शरद केवलिया हैं।


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