ताजा खबरे
प्रदर्शन : दिल्ली में क़िलाबन्दी ? सभी बॉर्डर सील‘पंचायत चुनाव जीतने पर कुंवारे युवकों की शादी कराउंगी’ : वोट दो-दुल्हन लो’अमेरिका में आरोपी को मौत की सजा सुनाई, लाइव दिखाने पर छिड़ी बहसडूंगर कॉलेज के शोधार्थी दीपक यादव को पीएच.डीआरोपी की गिरफ्तारी व निष्पक्ष जांच के आश्वासन के बाद धरना खत्म, मृतक का किया अंतिम संस्कारहनुमानगढ़ में पंचायत एवं जिला परिषद चुनावों को लेकर भाजपा ने तेज की तैयारियांमहाजन में खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग ने की कार्यवाहीये 9 रेलसेवाएं रद्द रहेंगी, ये है वजहसूर्य मंदिर में हुआ तर्पण, शहीदों के सम्मान में पोस्टर लगाकर दी श्रद्धांजलिआक्रोशित पार्षदों ने आयुक्त कार्यालय के आगे कचरा डाला, बेहाल सफाई व्यवस्था
IMG 20241101 132226 घोड़ी कूदी और पासों का खेला : सैंकड़ो वर्षों से बीकानेर में जुए की भी परम्परा Rajasthan News Portal देश
Share This News

Thar पोस्ट। बीकानेर में दीपावली पर सैकड़ों वर्षों से परम्परा के नाम पर जुआ खेला जाता है। परकोटे में इसे शगुन माना जाता है। हालांकि दीपवाली के अगले दिन सन्नाटा पसर जाता है। केवल परम्परा के तौर पर जुआ खेलने वाले इतने शातिर है कि एक आंख पैसों और खेल पर तो दूसरी आंख पुलिस की और रहती है। जुआ खेलते समय अगर गलती से भी पुलिस आ जाए तो जुआरी रफ्फू चक्कर हो जाते है। शहर के अलग-अलग स्थानों पर बैंक, फर्री, माताजी और पासों पर खेल जारी है। खिलाड़ी अलसुबह से देर रात तक -खेलो है क्या ? की आवाज देते हुए ही दिखाई देते हैं। दीपावली से करीब एक सप्ताह पहले ही यह जुआ शुरू हो जाता है  ईमानदारी के साथ जुआ खेला और खिलाया जाता है लेकिन केवल दीपावली तक। बाकायदा इसके लिए एक कैशियर भी पैसों का लेनदेन करताा है। हालांकि पुलिस को इस जुए की जानकारी होती है लेकिन परंपरा के नाम पर चलने वाले इस जुए को लेकर कोई कार्रवाई नही होती।


Share This News