ताजा खबरे
प्रदर्शन : दिल्ली में क़िलाबन्दी ? सभी बॉर्डर सील‘पंचायत चुनाव जीतने पर कुंवारे युवकों की शादी कराउंगी’ : वोट दो-दुल्हन लो’अमेरिका में आरोपी को मौत की सजा सुनाई, लाइव दिखाने पर छिड़ी बहसडूंगर कॉलेज के शोधार्थी दीपक यादव को पीएच.डीआरोपी की गिरफ्तारी व निष्पक्ष जांच के आश्वासन के बाद धरना खत्म, मृतक का किया अंतिम संस्कारहनुमानगढ़ में पंचायत एवं जिला परिषद चुनावों को लेकर भाजपा ने तेज की तैयारियांमहाजन में खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग ने की कार्यवाहीये 9 रेलसेवाएं रद्द रहेंगी, ये है वजहसूर्य मंदिर में हुआ तर्पण, शहीदों के सम्मान में पोस्टर लगाकर दी श्रद्धांजलिआक्रोशित पार्षदों ने आयुक्त कार्यालय के आगे कचरा डाला, बेहाल सफाई व्यवस्था
IMG 20230227 122605 बीकानेरी होली का कैलेंडर जारी, रातभर यहां होंगे ये आयोजन, समय के साथ ऐसे बदला स्वरूप Rajasthan News Portal देश
Share This News

Thar पोस्ट न्यूज बीकानेर। बीकानेर की होली विदेशों तक मशहूर है। इस रंगीली होली का कलैंडर जारी हो गया है। होली के आयोजनों में शामिल होने ले लिए प्रवासी भी बीकानेर आने लगे हैं। कहते है कि ब्रज की होली की तरह ही बीकानेरी होली का अपना माहौल है। यहां भी भांग छनाव से लेकर सभी तरह के कार्यक्रमों की बहार रहती है। रियासतकालीन होली की बात करें तो इस बारे में जानकारों का कहना है कि बीकानेर महाराजा का लवाजमा होली से पूर्व नगर सेठ लक्ष्मी नाथजी मंदिर पहुंचता था। इसके बाद महाराजा द्वारा ठाकुरजी को फाग खेलाई जाती थी। इसके बाद होली की शुरुआत मानी जाती थी। लवाजमा तेलीवाड़ा होते हुए लौटता था। पूरा शहर होली में डूब जाता था। गली व मोहल्लों में होली की मज़ाक की जाती थी। जूनागढ़ बेल्ट में अनेक डेरों व हवेलियों में होली की रंगत रहती थी। मनुहार, हंसी मजाक के दौर चलते थे। मैंने बचपन मे होली से कुछ दिन पूर्व चंगबाज़ों की गैर निकलते देखी है। वर्तमान में कई बदलाव आए है गैर बहुत कम हो गई है। अब तो व्हाट्स ग्रुप या अन्य सोशल मीडिया पर बने ग्रुप सदस्य होली खेलते है। अनेक लोग बीकानेर में रेत के धोरों पर बने रिसॉर्ट्स में भी होली खेलने जाते है। महिलाएं अब अधिक मुखर हुई है ग्रुप में होली खेलती है। कोडमदेसर भैरों जी मंदिर सहित लगभग सभी मंदिरों में फागोत्सव होते है। होलिका दहन व होली धुलंडी के दौरान बीकानेर के परकोटे में दम्माणी चौक, बारह गुवाड़, नथूसर गेट सहित अन्य चौक में पैर रखने की भी जगह नहीं होती। रम्मतों का दौर चरम पर रहता है। इस बीच जगह जगह कड़ाई दूध, कचोरी, पकोड़ी चाय सहित अन्य स्टालों की बहार पूरी रात रहती है। परकोटे के लोग भी अपने घरों के बाहर रहते है। सभी आयु वर्ग के लोग इसमे शामिल होते हैं। ठाकुरजी के सभी मंदिरों में फाग व धमाल गाई जाती है। इसलिए कहते है होली देखनी या खेलनी हो तो या जाइए ब्रज या बीकानेर। कलेंडर में जारी कार्यक्रमों में सुविधानुसार बदलाव आयोजक कर सकते हैं।


Share This News