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IMG 20241023 101608 राजस्थान के 60 हज़ार शिक्षकों की नौकरी पर संकट! यह है कोर्ट के आदेश Rajasthan News Portal राजस्थान
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Thar पोस्ट न्यूज। राजस्थान के हज़ारों शिक्षको की नॉकरी पर मंडराया संकट। शिक्षकों के लिए टीचर एलिजिबिलिटी टेस्ट (TET) को अनिवार्य करने संबंधी सुप्रीम कोर्ट के फैसले ने प्रदेश के करीब 60 हजार ग्रेड थर्ड शिक्षकों की नॉकरी पर बन आई है। ये शिक्षक हैं, जिनकी नियुक्ति 2010 में टेट लागू होने से पहले हुई थी। कोर्ट के आदेश के अनुसार अब उन्हें दो वर्ष की समय-सीमा में टेट उत्तीर्ण करना होगा। ऐसा नहीं करने पर उनकी सेवा पर संकट खड़ा हो सकता है। ऐसे में यह फैसला वर्षों से सेवाएं दे रहे इन शिक्षकों के लिए नौकरी पर मंडराते खतरे के रूप में देखा जा रहा है। इस मामले को लेकर शिक्षक संगठनों ने पुनर्विचार याचिका दाखिल करने और आंदोलन की रणनीति तेज कर दी है। सितंबर महीने के सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार सभी नए शिक्षकों के लिए टेट पास करना अनिवार्य होगा। वर्तमान सेवारत शिक्षकों को भी सेवा जारी रखने व पदोन्नति के लिए दो साल में टेट पास करना अनिवार्य होगा। सेवानिवृत्ति में पांच साल से कम समय वाले शिक्षकों को जरूर इससे छूट रहेगी।

देशभर में टेट 2009 में शिक्षा का अधिकार अधिनियम लागू होने के बाद 23 अगस्त 2010 को देशभर में अनिवार्य की गई। इसके बाद 2011 में पहली बार सीटेट आयोजित हुई थी। इसके बाद राज्यों ने अपने-अपने स्तर पर इसे लागू किया। राजस्थान में ये टेस्ट रीट के नाम से 2011 में लागू हुआ। इसके बाद हुई ग्रेड थर्ड शिक्षकों की भर्तियां इसी आधार पर हुई। प्रदेश की सरकारी स्कूलों में एल-1 व एल-2 के अभी करीब 2.30 लाख शिक्षक नियुक्त है। इनमें से करीब 1.70 हजार शिक्षक तो 2011 के बाद रीट के आधार पर भर्ती हुए हैं, लेकिन करीब 60 हजार शिक्षक 2010 से पहले के नियुक्त है। दो साल में रीट नहीं करने पर अब इन्हें नौकरी पर खतरा दिख रहा है।


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