





Thar पोस्ट न्यूज। युद्ध के बाद उपजे हालात का असर रसोई पर भी पड़ रहा है। अब 35 साल पहले के दौर की यादें ताजा होने वाली है जब रसोई में केरोसिन स्टोव का इस्तेमाल किया जाता था। हालांकि केरोसिन स्टोव मिलना भी अब मुश्किल है लेकिन केंद्र सरकार ने रविवार को फैसला लिया है कि अब राशन की दुकानों के साथ-साथ पेट्रोल पंप पर भी केरोसिन मिल सकेगा। सरकारी तेल कंपनियां तय किए गए पेट्रोल पंपों से भी केरोसिन रख और बांट सकेंगी। जिले में राज्य सरकार या केंद्रशासित प्रदेश प्रशासन अधिकतम 2 पेट्रोल पंप चुनेंगे, जहां यह सुविधा दी जाएगी। इन पेट्रोल पंपों पर अधिकतम 5 हजार लीटर तक केरोसिन रखा जा सकेगा। सरकार ने सप्लाई आसान बनाने के लिए 60 दिनों के लिए सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) के नियमों में ढील दी है, ताकि जरूरतमंद परिवारों तक तेल समय पर पहुंच सके।





भारत सरकार ने ये फैसला ईरान अमेरिका-इजराइल में संघर्ष के कारण लिया गया है। मिडिल ईस्ट में जारी जंग के कारण भारत में गैस, पेट्रोल-डीजल की कमी है। केंद्र सरकार लगातार मौजूदा हालात पर चिंता जता रही है। इसके साथ ही एलपीजी के विकल्पों पर ध्यान देना शुरू कर दिया है। युद्ध विशेषज्ञों का कहना है कि युद्ध लंबा चलेगा। हालांकि केरोसिन से पहले लकड़ी के चूल्हों का जमाना था। ये चूल्हे धुंआ उगलते थे लेकिन इसमे तैयार भोजन लाजवाब हुआ करता था। वर्तमान हाईटेक समय मे लकड़ी से तैयार भोजन अब ‘हेरिटेज श्रेणी’ में आता है। राजस्थान आने वाले पर्यटक इसे खासतौर पर पसंद करते है। रूरल टूरिज्म में भी इसका खास महत्व है। ग्रामीण इलाकों में रेत के समुंदर में कैमल सफारी करने वाले पर्यटकों को मिट्टी के चूल्हों या लकड़ी में बना खाना ही दिया जाता है। पर्यटक भी चूल्हे में तैयार खाने की विशेष मांग करते है।