Thar पोस्ट। ऊर्जा मंत्री डॉ. बी. डी. कल्ला और उच्च शिक्षा मंत्री भंवर सिंह भाटी ने प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री तथा हरियाणा व बिहार के पूर्व राज्यपाल श्री जगन्नाथ पहाड़िया के निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया है।डॉ. कल्ला ने अपने संवेदना संदेश में कहा कि स्व. पहाड़िया जमीन से जुड़े एक सच्चे जनसेवक थे, उन्होंने जीवनपर्यंत गरीब, वंचित एवं पिछड़े वर्ग के हितों के लिए समर्पित भाव से कार्य किया। वे विद्यार्थी जीवन से ही जनहित और सामाजिक सरोकारों के प्रति सक्रिय रहे। स्व. पहाड़िया ने सांसद, केन्द्र सरकार में मंत्री, प्रदेश के मुख्यमंत्री तथा हरियाणा एवं बिहार के राज्यपाल जैसे शीर्ष पदों पर सेवाएं देते हुए कुशल प्रशासक, संगठनकर्त्ता और संवैधानिक मूल्यों के प्रहरी के रूप में अपनी अमिट छाप छोड़ी। सार्वजनिक जीवन में कर्मठता और कर्त्तव्यपरायणता के साथ उनका अविस्मरणीय योगदान आने वाली पीढ़ियों का मार्गदर्शन करता रहेगा।जलदाय एवं ऊर्जा मंत्री ने दिवंगत की आत्मा को चिर शांति और शोक संतप्त परिजनों एवं उनके चाहने वालों को यह असीम दुःख सहन करने की शक्ति प्रदान करने की ईश्वर से प्रार्थना की है।
स्वर्गीय राजीव गांधी थे आधुनिक भारत के जनक-भंवर सिंह भाटी, उच्च शिक्षा मंत्री
डिजीटल इंडिया, लोकल गवर्नेस और यंग इंडिया स्वर्गीय राजीव गांधीजी की देन उच्च शिाक्षा मंत्री भंवर सिंह भाटी भारत रत्न स्वर्गीय श्री राजीव गांधी जी 30वीं पुण्य तिथि की पूर्व संध्या पर राजीव गांधी स्टडी सर्किल द्वारा‘‘आधुनिकभारत के विकास पर राजीव गांधी की दृष्टि’’विषय पर आयोजित राष्ट्रीय वेबीनार में विषिष्ट अतिथि के रूप में संबोधित करते हुए बताया कि वे अत्यंत गंभीर, दूरदर्षी और आधुनिक सोच व तीव्र निर्णय क्षमता वाले व्यक्तित्व के धनी थे।
भाटी ने कहा कि उन्होंने भारत को 21वीं सदी में आधुनिक भारत के निर्माण का सपना हमें सबसे पहले दिखाया और उस सपने को साकार करने के लिए अनेक आधारभूत योजनाएं बनाकर उन्हें लाग किया। देश को दूरसंचार, कंप्यूटरीकरण और आधुनिक शिक्षा को विष्व के विकसित देशों की श्रेणी में ले जाना उनकी नीतियों का मुख्य उद्देश्य था। उनका मानना था कि कंप्यूटर प्रौद्योगिकी और दूरसंचार के विकास से ही एक आधुनिक भारत का निर्माण संभव है। जो कि वर्तमान समय में सार्थक सिद्ध हो रहा है। वे डिजीटल इंडिया और दूर संचार क्रांति के जनक थे। उनकी दूरदर्शी सोच से ही आज भारत कंप्यूटर व सूचना प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में विश्व के अग्रणी दशों में प्रमुख स्थान रखता है। उन्होंने एक मजबूत, स्वतंत्र और आत्म निर्भर भारत के मिशन को लेकर अनेक योजनाओं और निर्णयों को लागू किया।
उच्च शिक्षा मंत्री ने बताया कि देश में शिक्षा नीति 1986 उन्हीं की देन है। उनका मानना था कि किसी भी देश का विकास शिक्षा के प्रचार-प्रसार से ही संभव है। उन्होंने देशभर में उच्च शिक्षा के आधुनिकीकरण और विस्तार तथा ग्रामीण भारत में शिक्षा के प्रसार के लिए कक्षा 6 से 12वीं तक निःशुल्क आवासीय शिक्षा व्यवस्था आरम्भ करने के लिए जवाहर नवोदय विद्यालय स्थापित किये। पंचायती राज के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों के विकास की आधार शिला रखी और सत्ता का विकेन्द्रीकरण पंचायत स्तर तक किये जाने के लिए संविधान में 73वंे व 74वें संषोधन की पृष्ठ भूमि तैयार की। मतदाताओं की आयु में कमी, स्थानीय स्वराज्य संस्थाओं में महिला आरक्षण, युवाओं के लिए जवाहर रोजगार योजना, अर्थव्यवस्था का उदारीकरण, फाइव-डेवीक, मजबूत सैन्य शक्ति के लिए मिसाइल और परमाणु कार्यक्रमों को बढ़ावा जैसे अनेक साहसिक निर्णय लिये।