



Thar post बीकानेर। रातीघाटी समिति द्वारा राव बीकाजी के सौभागदीप दुर्ग-वर्तमान श्री लक्ष्मीनाथ जी मंदिर परिसर में 488वें रातीघाटी युद्ध पर शहीदों को भावभीनी श्रद्धांजलि और पुष्पांजलि अर्पित की गई।
इस अवसर पर समिति के संस्थापक महामंत्री जानकी नारायण श्रीमाली ने कहा कि राव बीकाजी के पोते राव जैतसी ने राजस्थान, सिंध, गुजरात व मालवा के 36 राजवंशों और 36 जातियों की समन्वित शक्ति के बादशाह बाबर के पुत्र लाहौर के शासक कामरां को मिगसर कृष्णा चौथ और पंचमी को 21 घंटे चले युद्ध में पराजित किया। उस समय मुल्तान, नागौर व अजमेर में शक्तिशाली मुस्लिम राज्य था। बीकानेर और मेड़ा हिन्दू राज्य थे। इस युद्ध में बीकानेर की पराजय होती तो आज अजमेर तक पाकिस्तान होता।
श्रीमाली ने कहा कि समिति के प्रयासों से राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड अजमेर के कक्षा 8 एवं 10 में रातीघाटी युद्ध को समावेशित किया गया है। समिति एन.सी.आई.टी. के पाठ्यक्रम में इस युद्ध को स्थान दिलाने के लिए प्रयासरत है।




समारोह के प्रारंभ में पंडित ओम नारायण श्रीमाली ने स्वस्ति वाचन किया। समिति उपाध्यक्ष पुरुषोत्तम सेवग, कमल नयन शुक्ला, ओम नारायण व्यास प्रेरणा-प्रतिष्ठान, जगदीश आचार्य, एडवोकेट और किशोर बांठिया ने भी अपने विचार रखे।
समिति अध्यक्ष श्री नरेन्द्र सिंह बीका ने आभार प्रकट किया। इस अवसर पर सर्वश्री मदन सोनी, मनोज कुमार प्रजापत, पं. राकेश ओझा, प्रदीप जोशी, मनीष धींगड़ा एवं सतीश दाधीच सहित गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।

