Thar पोस्ट, न्यूज। राजस्थान के बीकानेर में पहली बार आयोजित हो रहे राष्ट्रीय संस्कृति महोत्सव का राष्ट्रपति करेगी उद्घाटन
बीकानेर. भारत की राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मू को राजस्थान में पहली बार बीकानेर में आयोजित होने वाले राष्ट्रीय संस्कृति महोत्सव के 14 वे संस्करण का उद्घाटन करेगी। राष्ट्रपति दोपहर 01:55 बजे राष्ट्रपति भवन से रवाना होकर दोपहर 02:10 बजे पालम हवाई अड्डे पहुंचेंगी। वहां से दोपहर 02:20 बजे बीकानेर के नाल एयरफोर्स स्टेशन के लिए रवाना होंगी एवं दोपहर 03:25 बजे नाल एयर फोर्स स्टेशन पहुंचेगी। राष्ट्रपति कार्यक्रम स्थल डॉ करणी सिंह स्टेडियम दोपहर 3:50 पर पहुंचेगी जहां उनका ढोल एवं नगाड़ों के साथ स्वागत किया जाएगा। राजस्थान के राज्यपाल कलराज मिश्र राष्ट्रपति की अगवानी करेंगे। 4:02 पर राष्ट्रपति द्वारा क्राफ्ट आंगन एवं कूजिन एरिया का दौरा किया जाएगा। राष्ट्रपति राजस्थान में पहली बार बीकानेर में आयोजित
होने वाले राष्ट्रीय संस्कृति महोत्सव के 14वें संस्करण का नगाड़ा बजाकर उद्घाटन करेंगी।
राष्ट्रपति के साथ कार्यक्रम में राजस्थान के राज्यपाल श्री कलराज मिश्रा केंद्रीय संस्कृति राज्य मंत्री श्री अर्जुन राम मेघवाल,
राजस्थान के कला और संस्कृति मंत्री डॉक्टर बी डी कल्ला,नगर निगम बीकानेर की मेयर सुशीला कंवर राजपुरोहित सहित मैदान में गणमान्य नागरिक मौजूद रहेंगे।

सूफी गायन, ओड़िशी नृत्य और लोक वाद्य यंत्रों की धुनों ने दिल जीता

बीकानेर। डॉ. करणी सिंह स्टेडियम में रविवार की शाम तब सुरमई हो गई जब स्थानीय कलाकारों ने संगीत, गायन-वादन और डांस से समां बांध दिया। एक से बढ़कर एक प्रस्तुति ने दर्शकों की खूब वाहवाही लूटी। इन कलाकारों में मास्टर भंवर ने जहां मायड़ थारो पूत कठे… वो महाराणा प्रताप कठे से दर्शकों में खासकर युवाओं में जोश भर दिया, वहीं ओडिशी नृत्यांगना तेजस्विनी गौतम ने अपनी राधा-कृष्ण की खूबसूरत प्रस्तुति से दर्शकों की खूब तालियां बटोरी। कार्यक्रम में केंद्रीय संस्कृति राज्यमंत्री अर्जुनराम मेघवाल और मंत्रालय की संयुक्त सचिव अमिता प्रसाद सरभाई ने सभी स्थानीय कलाकारों को सम्मानित किया। इस मौके पर पश्चिम क्षेत्र सांस्कृतिक केन्द्र की निदेशक किरण सोनी गुप्ता, उत्तर क्षेत्रीय केन्द्र पटियाला के निदेशक फुरकान खान भी मौजूद थे।
इस कार्यक्रम में सबसे पहले मास्टर भंवर के मायड़ थारो पूत कठे… हल्दी घाटी रे टीला सूं, शिव पार्वती देख रहया… और धरती धोरां री… के सुमधुर सूफी फ्यूजन से हर संगीत प्रेमी का दिल जीत लिया। तो, खंजर क्लब ने इस फाल्गुन मास में होली के फाग गीतों की प्रस्तुति से माहौल रंगीन कर दिया, लेकिन खास बात यह रही कि इस फाग में समाज को बेहतरी के संदेश छिपे थे। इसमें जहां माता पिता और गाय की सेवा का संदेश युवाओं तक पहुंचा, वहीं चंग की थाप ने कानों में फाग का रस घोल दिया।
अलगोजा की धुनों से रिझाया-
लोक संगीतज्ञ मनोज एंड पार्टी ने दो बांसुरी से बने वाद्ययंत्र अलगोजा की मधुर धुनों से श्रोताओं का मंत्रमुग्ध कर दिया। तो, एक और लोक वाद्य यंत्र भपंग की मनोहारी धुनों से अलवर के भपंग वादक मेहमूद खां ने भी खूब समां बांधा।

तेजस्विनी के नृत्य ने वाहवाही लूटी-

देश-विदेश में दर्शकों का दिल जीत चुकी राजस्थान के पुष्कर की अंतरराष्ट्रीय स्तर की नृत्यांगना तेजस्विनी गौतम ने ओडिशी नृत्य की प्रस्तुति से दर्शकों का मनमोह लिया। उसके नृत्य में जहां भावभंगिमा यानी अदायगी उम्दा रही, वहीं सधी हुई इस पेशकश ने खूब तालियां बटोरी। बन्ना रे बागा में झूला घाल्या… होलिया में उड़े रे गुलाल …और दिल है छोटा सा छोटी सी आशा जैसे गाने पेश कर असम की सिंगर पॉम्पी पल्लवी ने रविवार की रात डॉक्टर करणी सिंह स्टेडियम में श्रोताओं पर सुरों का जादू चला दिया। दरअसल असम के दीमापुर की रॉक बैंड ने जब स्टेज पर एंट्री की तो श्रोताओं को नहीं लगा था कि बैंड की बेहतरीन सिंगर कौन सी पल्लवी अपने सुरों की बरसात से उन्हें संगीत के माहौल सराबोर कर देंगी। सिंगर पॉम्पी ने न सिर्फ हिंदी फिल्मी गाने गाए बल्कि राजस्थानी और ठेठ मारवाड़ी गीत गाकर श्रोताओं का मन मोह लिया। अंत में उन्होंने दिल घूम घूम करे घबराए… गाना पेश किया श्रोता झूम उठे। असम की खूबसूरत बैंड की प्रस्तुतियों से पहले ओडिशा की कटक कला विकास केंद्र के नृतकों और नृत्यांगनाओ ने गुरु गजेंद्र कुमार पंडा के निर्देशन में खूबसूरत ओडिशी नृत्य पेश कर दर्शकों को झूमने पर मजबूर कर दिया। इन डांसर्स ने इस सामूहिक प्रस्तुति में लय और ताल की बेहतरीन अदायगी की। उनका गेट अप और मेकअप भी शानदार रहा।पंजाब पुलिस बैण्ड ने पंजाबी गीतों से बांधा समां
नॉर्थ जोन कल्चरल सेंटर के पंजाब पुलिस बैण्ड ने पंजाबी गीतों से समां बांधा। पुलिस बैण्ड ने पंजाब के पारंपरिक परिधानों के साथ पंजाबी लोेक गीतों की जोरदार प्रस्तुति दी। जिसमें पंजाबी लोकगीत छल्ला—छल्ला सहित कई लोकगीतों का गायन किया।