





Thar पोस्ट, बीकानेर। महाराजा गंगा सिंह विश्वविद्यालय, बीकानेर का षष्ठ दीक्षान्त समारोह दिनांक 20 फरवरी, को मध्याह्न 12ः00 बजे श्री कलराज मिश्र, माननीय राज्यपाल, राजस्थान एवं कुलाधिपति महोदय की अध्यक्षता में आॅनलाईन आयोजित होगा। दीक्षान्त समारोह में परीक्षा 2019 की 1.05 लाख उपाधियों एवं 06 संकायों के 55 शोधार्थियों को विद्या वाचस्पति (पीएच.डी.) की उपाधियां प्रदान की जाएगी।
दीक्षान्त समारोह में राजकीय लोहिया महाविद्यालय, चूरू की छात्रा सुश्री गुंजन तोदी को कुलाधिपति पदक, श्री जैन कन्या पी.जी. महाविद्यालय, बीकानेर की छात्रा, सुश्री मोनारानी मुंजाल को कुलपति पदक, स्नातक वाणिज्य में सर्वोच्च अंक प्राप्त करने वाली बिनानी कन्या महाविद्यालय, बीकानेर की छात्रा सुश्री साक्षी पुरी को आई.सी.एस.आई. अवार्ड प्रदान किया जाएगा, साथ ही परीक्षा 2019 में सर्वोच्च अंक प्राप्त करने वाले 56 अभ्यर्थियों को स्वर्ण पदक प्रदान किया जाएगा। दीक्षान्त समारोह में विश्वविद्यालय द्वारा प्रकाशित स्मारिका दीक्षा का विमोचन किया जाएगा।
दीक्षान्त समारोह में मुख्य अतिथि के रूप श्री राजेन्द्र सिंह यादव, उच्च शिक्षा राज्यमंत्री एवं विशिष्ट अतिथि के रूप प्रो. पाॅल रोबिन्स, डाॅयरेक्टर, नेल्सन इन्स्टिट्यूट आॅफ एन्वायरमेन्टल स्टडीज, यूनिवर्सिटी आॅफ विंस्काॅसिन, मेडिसन (यू.एस.ए.) होंगे।
दीक्षान्त समारोह में माननीय राज्यपाल महोदय द्वारा संविधान की प्रस्तावना एवं अनुच्छेद 51 क में वर्णित मूल कत्र्तव्यों का वाचन किया जाएगा। तत्पश्चात् माननीय कुलाधिपति महोदय की अनुमति से कुलपति द्वारा विद्यार्थियों को दीक्षान्त मंत्र दिया जाएगा।
दीक्षान्त समारोह के एक दिन पूर्व आज पूर्वाभ्यास किया जाएगा जिसमें विद्या परिषद् एवं प्रबन्ध बोर्ड सदस्य, संकायाध्यक्ष, कुलपति एवं कुलसचिव उपस्थित रहेंगे।
दीक्षान्त समारोह में प्रबन्ध बोर्ड एवं विद्या परिषद् के माननीय सदस्यगण, पदक एवं विद्या-वाचस्पति की उपाधि प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों को निर्धारित पोशाक में विश्वविद्यालय में उपस्थित होने के लिए आमंत्रित किया गया है। दीक्षान्त समारोह में माननीय राज्यपाल एवं कुलाधिपति महोदय की अनुमति उपरान्त आॅनलाइन दीक्षान्त समारोह की समाप्ति पश्चात् कुलपति महोदय द्वारा विद्यार्थियों को उपाधि एवं पदक प्रदान किये जाएंगे।





करोड़ों लोगों की मातृभाषा राजस्थानी को मिले संवैधानिक मान्यता- डाॅ. केवलिया
अकादमी की ओर से ‘मायड़ भासा रो मान अर उजास’ विषयक राजस्थानी संगोष्ठी आयोजित
Thar पोस्ट, बीकानेर, 19 फरवरी। वरिष्ठ साहित्यकार डाॅ. मदन केवलिया ने कहा कि राजस्थानी करोड़ों लोगों की मातृभाषा है। यह अत्यंत समृद्ध भाषा है, इसका गौरवशाली इतिहास रहा है तथा इसमें उत्कृष्ट साहित्य-लेखन किया जा रहा है। मायड़ भाषा को शीघ्र ही संवैधानिक मान्यता मिलनी चाहिए।
डाॅ. केवलिया शनिवार को राजस्थानी भाषा, साहित्य एवं संस्कृति अकादमी की ओर से विश्व मातृभाषा दिवस के उपलक्ष्य में प्रतिमान संस्थान में आयोजित ‘मायड़ भासा रो मान अर उजास’ विषयक राजस्थानी संगोष्ठी में बोल रहे थे। केवलिया ने कहा कि राजस्थानी भाषा, कला एवं संस्कृति की भारत ही नहीं, पूरे विश्व में सराहना की जाती है। उन्होंने कहा कि युवा पीढ़ी मायड़ भाषा में बोले, पढ़े व लिखे तथा साहित्यकार पूर्ण निष्ठा व संकल्प के साथ राजस्थानी में निरंतर लेखन करें।
कवि-कथाकार राजेन्द्र जोशी ने कहा कि राजस्थानी को संवैधानिक मान्यता मिले, इसके लिए समन्वित व गंभीर प्रयासों की आवश्यकता है। युवा पीढ़ी को राजस्थानी साहित्य-संस्कृति की जानकारी दी जाए। राजकीय डूंगर महाविद्यालय में सहायक आचार्य (हिन्दी) डाॅ. एजाज अहमद कादरी ने कहा कि राज्य की प्रतियोगी परीक्षाओं में राजस्थानी भाषा, कला एवं संस्कृति से संबंधित अधिकाधिक प्रश्न पूछे जाएं। श्री नेहरू शारदापीठ महाविद्यालय में राजस्थानी के विभागाध्यक्ष डाॅ. गौरीशंकर प्रजापत ने राजस्थानी की मान्यता हेतु किए जा रहे प्रयासों की जानकारी देते हुए कहा कि राजस्थानी को मान्यता मिलने से बड़ी संख्या में युवाओं को रोजगार मिलेगा।
अकादमी सचिव शरद केवलिया ने राजस्थानी भाषा अकादमी द्वारा राजस्थानी भाषा-साहित्य के उन्नयन व विकास की दिशा में उठाए जा रहे कदमों की जानकारी दी।
