





Thar पोस्ट, नई दिल्ली। यूक्रेन- रूस विवाद से अनेक देश चिंतित है। यूक्रेन की सीमा से रूसी सैनिकों की वापसी पर संदेह के साथ ब्रशेल्स में नाटो के रक्षा मंत्रियों की बैठक हुई है. हमले की सूरत में नाटो सीधे दखल देगा, यह कहना मुश्किल है लेकिन सुरक्षा के कुछ उपायों पर चर्चा हुई है। नाटो के सदस्य देशों ने संगठन के पूर्वी हिस्से में मौजूद देशों की सुरक्षा को मजबूत करने के नए तरीकों पर चर्चा शुरू की है। बीते कई दशकों में यूरोप के लिए सुरक्षा की सबसे बड़ी चिंता पैदा की है।





दो दिनों तक ब्रशेल्स के नाटो मुख्यालय में सदस्य देशों के रक्षा मंत्री इस बात पर चर्चा की है अगर रूस यूक्रेन पर हमले का आदेश देता है तो कैसे और कब नाटो अपने सैनिक और साजोसामान रूस के नजदीक जल्दी से पहुंचाएगा. अमेरिकी रक्षा मंत्री लॉयड ऑस्टिन और उनके समकक्ष दक्षिणी पश्चिमी यूरोप में लंबे समय तक सेना की तैनाती की योजना का भी जायजा लेंगे। इस योजना पर अमल इसी साल किसी वक्त शुरू हो सकता है.इस्टोनिया, लात्विया, लिथुआनिया और पोलैंड में जिस तरह से सैनिकों की तैनाती की गई है, उसी तरह से इन सैनिकों की तैनाती भी रोटेशन के आधार पर होगी. इसमें करीब 5000 सैनिक होंगे. अमेरिका ने पोलैंड और रोमानिया में 5000 सैनिकों की तैनाती शुरू की है. ब्रिटेन सैकड़ों सैनिक पोलैंड भेज रहा है और उसने ज्यादा जंगी जहाजों और विमानों की पेशकश की है. जर्मनी, नीदरलैंड्स और नॉर्वे भी लिथुआनिया में अतिरिक्त सैनिक भेज रहे हैं. डेनमार्क और स्पेन एयर पुलिसिंग के लिए जेट विमान दे रहे हैं.