ताजा खबरे
पाकिस्तान से जुड़े थे तार! **70 करोड़ रुपए की हेरोइन बरामदगी मामले में दो गिरफ्तार, पुलिस अधीक्षक की प्रेस वार्ताकोटगेट पर कांग्रेस का प्रदर्शनव्यापार मंडल के अध्यक्ष राठी ने शोभासर औद्योगिक क्षेत्र की समस्याओं के समाधान हेतु जिला कलेक्टर से की वार्तातरबूज मिलावटी या जहरीला जानलेवा तो नहीं? ऐसे करें पहचान, चिकित्सक ने 4 जनोँ की मौत की वजह बताईसांखला व कोटगेट रेलवे फाटक पर जाम के दौरान लगेगा छाया टेंट, श्याम पंचारिया की मांग पर जिला कलेक्टर ने दिए निर्देशगंगा तट पर होगा चार दिवसीय यज्ञोपवित संस्कार, बीकानेर से सैकड़ों बच्चे धारण करेंगे जनेऊकार्यालयों में ताले लटके मिले, श्री कोलायत बीकानेर में राज्य स्तरीय आकस्मिक निरीक्षण : बड़ी संख्या में कार्मिक अनुपस्थितनिःशुल्क यज्ञोपवीत संस्कार में 89 बटुकों का हुआ उपनयनकांग्रेस ने तीन मंडल अध्यक्ष बदलेग्राम रथ अभियान: बीकानेर में जनप्रतिनिधियों व अधिकारियों ने हरी झंडी दिखाई
IMG 20251019 WA0013 दीपावली पूजन, शुभ मुहूर्त, 18 से 23 तक दीपोत्सव, गोवर्धन पूजा इस दिन Rajasthan News Portal धर्म
Share This News

Thar पोस्ट। धर्मशास्त्रों, ग्रहों की स्थिति और ज्योतिष गणनाओं के अनुसार इस बार 20 अक्टूबर 2025, सोमवार की रात को ही प्रदोष काल, अमावस्या तिथि, निशीथ काल, वृषभ लग्न और सिद्धि योग का दुर्लभ संयोग बन रहा है, जो लक्ष्मी-गणेश पूजन के लिए सर्वोत्तम माना गया है। प्रोफेसर विनोद शास्त्री के अनुसार दीपाेत्सव के लिए  निम्न मुहूर्त इस बार रहेंगे।

 20 अक्टूबर का दिन इसलिए खास

20 अक्टूबर 2025 को कार्तिक कृष्ण अमावस्या है, नक्षत्र रहेगा स्वाति, चंद्रमा तुला राशि में, और बनेगा सिद्धि योग। इसी दिन प्रदोष काल, अमावस्या, वृषभ लग्न और निशीथ काल एक साथ आ रहे हैं, जो महालक्ष्मी पूजन के लिए सर्वश्रेष्ठ संयोग माना जाता है। यही कारण है कि इस दिन लक्ष्मी, गणेश और कुबेर पूजन करना अत्यंत फलदायी रहेगा।

  • प्रदोष काल: शाम 5:46 बजे से रात 8:18 बजे तक
  • लक्ष्मी पूजन मुहूर्त: शाम 7:08 से रात 8:18 बजे तक
  • वृषभ लग्न: रात 7:29 से 9:26 तक
  • सिंह लग्न (मध्यरात्रि पूजन): रात 1:57 से 4:12 तक

शास्त्रों में वर्णित है —”अमावास्यायां तु प्रदोषकाले दीपदानं विशेषतः। लक्ष्म्यै च विधिवद् पूजां धनधान्यप्रदं स्मृतम्॥”
(अर्थ: अमावस्या की प्रदोष वेला में विधिपूर्वक लक्ष्मी पूजन और दीपदान करने से धन, धान्य और समृद्धि की प्राप्ति होती है।)

 दिवाली पर्व का पूरा कैलेंडर

  • 18 अक्टूबर: धनतेरस
  • 19 अक्टूबर: नरक चतुर्दशी
  • 20 अक्टूबर: मुख्य दिवाली पूजा (महालक्ष्मी पूजन)
  • 21 अक्टूबर: घरों में उत्सव, गृह पूजन और सामाजिक आयोजन
  • 22 अक्टूबर: गोवर्धन पूजा
  • 23 अक्टूबर: भाई दूज

क्यों 20 अक्टूबर को ही करें पूजा?

चार विशिष्ट रात्रियां — कालरात्रि (शिवरात्रि), महारात्रि (दिवाली), मोह-रात्रि (जन्माष्टमी), दारुण रात्रि (होली) — इन सभी में निशीथकाल और रात्रि पूजन का विशेष महत्व है। इस बार दिवाली की अमावस्या 20 अक्टूबर की रात में ही पड़ रही है, इसलिए यही दिन महालक्ष्मी पूजन के लिए शास्त्रसम्मत और फलदायक रहेगा।

 21 अक्टूबर को क्यो नहीं गोवर्धन पूजा?

21 अक्टूबर को घरों में दीप सज्जा, परिवारिक पूजा, मेहमान नवाजी और उत्सव मनाना शुभ रहेगा, लेकिन लक्ष्मी पूजन 20 अक्टूबर की रात ही करें। 22 को गोवर्धन पूजा की बात पंचागकर्ताओं ने कही है।
 


Share This News