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ScreenShot2020 08 19at5.45.42PM 30 करोंडों लोगों की दीवानगी- ASMR यू ट्यूब वीडियो-आप भी महसूस करें Rajasthan News Portal बीकानेर अपडेट
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Thar पोस्ट। दुनिया के करोड़ों लोग asmr वीडियो के दीवाने है यूट्यूब पर आपने ऐसे वीडियो जरूर देख लिए होंगे, जिसमें लोग फुसफुसाकर बोलते हैं, ऑडियंस का मेकअप करने की एक्टिंग करते हैं, चाकू से साबुन काटते हैं, और किसी गिफ्ट को पैक करते हैं या किसी चीज को खुरचकर आवाज निकालते हैं. यह सारे तरीके ऑटोनमस सेंसरी मेरीडियन रिस्पांस यानी ASMR प्रभाव को पैदा करने वाले हैं. जिसका मतलब यह है कि इन वीडियो को देखकर लोगों के दिमाग और तंत्रिका तंत्र में एक सरसराहट भरा खुशनुमा अहसास होता है. रात में सोने से पहले इंस्टाग्राम और यूट्यूब जैसे सोशल मीडिया पर रोज करोड़ों लोग ये वीडियोज देखते हैं।भारत में भी रोजाना इसे लाखों लोग देखते हैं. लेकिन भारतीय दर्शक भीड़भाड़ वाले इलाके में बाल काटने, मसाज कराने, शरीर के जोड़ चटकाने, ढेर सारा खाना खाने और नाखून काटने जैसे एएसएमआर वीडियोज ज्यादा पसंद कर रहे हैं. जानकार बताते हैं, “बदलती जीवन शैली और शहरी परिवेश ने नींद से जुड़ी कई बीमारियों को जन्म दिया है.” एएसएमआर की बढ़ती लोकप्रियता का एक पहलू यह भी है. कई यूट्यूबर तो इन वीडियोज के जरिए स्ट्रेस, एंजाइटी और माइग्रेन को भी कम करने का दावा करते हैं. एएसएमआर वीडियोज में सबसे बड़ा रोल साउंड का होता है. इसलिए किसी बनावटी संगीत के बजाए यूट्यूबर खाने, मसाज करने, बाल काटने आदि की जो गतिविधि कर रहे होते हैं, उसी का बारीकी से रिकॉर्ड किया साउंड एएसएमआर वीडियो में डालते हैं। आपको ASMR में आराम, सुरक्षा और देखभाल का वैसा ही अहसास होता है, जैसा किसी बच्चे को अपनी मां के करीब होता है. मसलन जब कोई जानवर अपने बच्चे को चाटकर साफ करता है, तो उसके बच्चे को जैसा लगता है, वैसा ही ASMR वीडियो देख-सुनकर हमें भी लग सकता है. मेंटल हेल्थ एक्सपर्ट हिमानी कुलकर्णी कहती हैं, “एएसएमआर एक खुशनुमा एक्साइटमेंट जैसा प्रभाव पैदा करता है. जैसे किसी का झूला झूलना. यह एक तरह के ब्रेन ऑर्गेज्म का अहसास कराता है. दिमाग के साथ शरीर पर भी इसका असर होता है क्योंकि इसे देखने-सुनने के दौरान आपकी धड़कन धीमी हो जाती है और रोएं खड़े हो जाते हैं. यह दिमाग के एक्साइटमेंट वाले हिस्से को एक्टिव कर देता है, जिससे सिरदर्द और नींद न आने के लिए जिम्मेदार दिमागी हिस्सा कम प्रभावी हो जाता है और लोग सो जाते हैं.”तो क्या ASMR का अहसास सिर्फ कुछ खास लोगों पर ही होता है और कुछ लोगों को इससे कुछ महसूस नहीं होता? मैनचेस्टर मेट्रोपोलिटन यूनिवर्सिटी में ASMR पर पहली स्टडी में शामिल रहे डॉ. निक डेविस कहते हैं, “हो सकता है कुछ लोगों पर इसका अहसास न हो लेकिन अब तक हमें यही समझ आया है कि सभी को इसका अहसास होता है. बस यह भी उसी तरह होता है, जैसे दो लोग अपने दर्द के बारे में बात करें. ज्यादातर मौकों पर दोनों के दर्द का अनुभव और स्तर अलग-अलग पर होता है. इसी तरह अलग-अलग इंसान के लिए एएसएमआर का अहसास भी अलग-अलग है.”


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