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पब्लिक पार्क की अनकही दास्तान, तब एक महाराजा ने प्रजा को दी थी यह सौगात, ”प्रवेश द्वार क्वीन एम्प्रेस मेरी गेट’ का मूल स्वरूप लौटेगा ?केंद्रीय गृह मंत्री ने ‘ऑपरेशन ट्राइडेंट’ के जरिए नशाखोरों को दी चेतावनी, 38 स्थानों पर छापेसड़क हादसे में 2 की मौतराजस्थान में 29 से फिर बदलेगा मौसमरविवार 25 अक्टूबर 2026 पंचांग, शरद पूर्णिमाशरद पूर्णिमा पर कल सजेगी ‘शरद संगत’, सुर, ताल और साहित्य का होगा संगमव्यास दंपति को मिली डॉक्ट्रेट की उपाधिविप्र फाउंडेशन की संयुक्त संगठनात्मक बैठक में इन मुद्दों पर मंथनउमंग” वार्षिकोत्सव में रंगारंग प्रस्तुतियांरिको ने बीडीए को सौंपा बीकानेर जिले के 4 औद्योगिक क्षेत्रों में विकास का जिम्मा
IMG 20261025 140039 पब्लिक पार्क की अनकही दास्तान, तब एक महाराजा ने प्रजा को दी थी यह सौगात, ''प्रवेश द्वार क्वीन एम्प्रेस मेरी गेट' का मूल स्वरूप लौटेगा ? Rajasthan News Portal देश, बीकानेर अपडेट, राजस्थान
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Thar पोस्ट (जितेंद्र व्यास) रियासत काल में महाराजा गंगासिंह एक दूरदर्शी शासक थे, जिन्होंने भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए आमजन की सुविधाओं के लिए कई कार्य किए। शहर का प्रसिद्ध ‘पब्लिक पार्क’ भी उन्हीं की देन है। महाराजा गंगासिंह द्वारा इस पार्क का निर्माण बेहद तल्लीनता और सुंदरता के साथ करवाया गया था, जिसके चलते इसका नाम ‘गंगानिवास पब्लिक पार्क’ रखा गया।

पार्क के निर्माण का इतिहास (वर्ष 1909-10)

​नगर की सुंदरता को बढ़ाने के उद्देश्य से वर्ष 1909-10 में पब्लिक पार्क के निर्माण का प्रस्ताव दरबार में आया था और महज दो वर्षों में इसका स्वरूप सामने आ गया:

  • ​मुख्य द्वार: पार्क के मुख्य द्वार का नाम ‘क्वीन एम्प्रेस मेरी गेट’ रखा गया, जिसके लोहे के गेट इंग्लैंड में बकिंघम पैलेस के दरवाजों से मेल खाते हैं। वर्तमान में यहां पिलर निर्माण चल रहा है क्या मूल स्वरूप बजूद में रहेगा ?
  • ​अन्य द्वार: पार्क के दूसरे गेट का नाम ‘लॉर्ड मिंटो’ गेट (सर्किट हाउस की ओर) और तीसरे गेट का नाम ‘डनलप स्मिथ गेट’ (डूंगर सिंह जी की प्रतिमा की ओर) रखा गया।

​मिंटो टेरेस और संगमरमर की मूर्तियां

मुख्य द्वार के बाईं ओर लॉर्ड मिंटो के नाम से समतल 634 फीट लंबे टेरेस का निर्माण किया गया, जिसे ‘मिंटो टेरेस’ कहा जाता है:

  • ​मूर्तियां: टेरेस के प्रारंभिक स्थान पर मां सरस्वती की मूर्ति और संगीताचार्य रामकृष्ण पांण्डे की स्मृति में लगाई गई टेरेस पर राजा डूंगर सिंह की श्वेत संगमरमर की मूर्ति वर्ष 1916 में स्थापित की गई थी। इसकी छतरी तक की ऊंचाई 74 फीट है।
  • ​लागत: भारतीय कला के इस उत्कृष्ट नमूने के निर्माण में उस समय लगभग 1.37 लाख रुपये की लागत आई थी।

​पार्क का विस्तार और सौंदर्यीकरण

महाराजा गंगासिंह के मित्र एवं पॉलिटिकल एजेंट सर चार्ल्स बेले एवं लेडी बेले की याद में बनवाए गए इस पार्क को बाद में ‘इन्दिरा फाउण्टेन’ के नाम से भी जाना जाने लगा:

  • ​मुख्य द्वार के ठीक दाईं ओर महाराजा गंगासिंह के निजी ट्यूटर मिस्टर बरें एर्टजेन के नाम पर लाल पत्थर से एक सुंदर टेरेस और पार्क का निर्माण किया गया। इसे क्राउन पार्क के नाम से भी जाना जाता है।
  • ​वर्ष 1921 में जल प्राणियों के लिए मेहराब ‘लेडी मिंटो गेट’ के पास बनवाया गया।
  • ​शहीदों की याद में वर्ष 1912 में कीर्ति स्तंभ का निर्माण करवाया गया, जिसकी डिजाइन इंजीनियर कर्नल स्टीटन जैकब ने तैयार की थी। लाल पत्थर व संगमरमर से बने इस कीर्ति स्तंभ की ऊंचाई 66 फीट है।

भामाशाह भी आगे आए

  • ​चिड़ियाघर व जन्तुआलय: बीकानेर के सेठ-साहूकारों ने दिल खोलकर राशि खर्च की। वर्ष 1926 में 43,670 रुपये की लागत से चिड़ियाघर और 62,751 रुपये की सहायता से जन्तुआलय का निर्माण हुआ।
  • ​श्रीगंगा थियेटर: पार्क परिसर में ही वर्ष 1932 में श्रीगंगा थियेटर का निर्माण करवाया गया, जिस पर 3.11 लाख रुपये की लागत आई। वर्तमान में यह बन्द है।
  • ​विशेष प्रतिमा: पार्क में महाराजा गंगासिंह की अश्वारुढ कांस्य की प्रतिमा भी स्थापित है।

उद्धघाटन हुआ जब

  • ​उद्घाटन: महाराजा गंगासिंह के शासनकाल के 40 वर्ष पूरे होने पर बीकानेर की प्रजा की ओर से यह पार्क महाराजा को भेंट किया गया था। इसका उद्घाटन वाइसराय लॉर्ड विलिंगटन ने किया था। पूरा पार्क इंग्लैंड के एक पार्क की अनुकृति है।
  • ​वर्तमान उपेक्षा: हालांकि, समयांतर में इसके रखरखाव में कमी आई है। वर्तमान में स्थिति यह है कि कोर्ट परिसर जर्जर बेदम होता जा रहा है और पार्किंग की उचित व्यवस्था भी नहीं बची है।

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