


Thar पोस्ट (जितेंद्र व्यास)। चुनाव और अश्लील गालियां। इसकी शरुआत कहाँ से हुई, यह कहना मुश्किल है लेकिन अब ये देश में यह घुल चुकी है। दिल्ली के जंतर:मंतर पर न केवल युवकों द्वारा बल्कि युवतियों द्वारा जमकर अश्लील गालियां बकी गई थी। इसे सभी ने देखा सुना था। राजस्थान के जोधपुर, नागौर, बीकानेर सहित अन्य जिलों कुछ नेता व व्यवसाइयों को सरेआम गालियां बकते देखा जा सकता है। इस निकाय चुनाव में भी गालियां परोसी जा रही है। हाल ही में आई एक फ़िल्म धुरंधर में तो गालियों की भरमार है और राजस्थान के निकाय चुनाव में भी कुछ ऐसा ही माहौल बना दिया गया है। हर वार्ड में इतने निर्दलीय प्रत्याशी है की मानो वो ही वार्ड के सिरमौर बनेंगे। राजस्थान में एक नेताजी के वीडियो तो अत्यधिक वायरल ही अश्लील गालियों की वजह से हुए है। उनके भाषण के अंश इस प्रकार है: बकरी के किता… बो……हुवे..भोस….चुनाव लड़ने चाल्या है। इसी तरह देश के एक नामी व्यवसायी तो गाली के बिना बात ही नहीं करते थे। राजस्थान के एक दंबग नेता का पारा हाई होते ही वे गालियों की बौछार कर देते है। कुछ लोग गालियां बर्दाश्त नही कर पाते तो वे दबे स्वरों में इतना ही कह पाते है। आप मेरी …गां…क्यो मार रहे हो, उसे कहो। युवतियां भी अश्लील गालियां बकने में पीछे नही है। हाल ही में बीकानेर के एक वार्ड में नेताजी में कार्यकर्ताओं के बीच पहुंचकर यह कहते हुए सुने गए …..चु…समझ रखा है बहन चो…..। इस चुनाव में ही बीकानेर में एक वायरल ऑडियो में अश्लील गालियाँ पड़ोसी गई जिसे मीडिया में साउंड स्किप किया गया। हालांकि अश्लील गालियां पुराने समय में भी बोली जाती थी। लेकिन अब ये बोलचाल में आम हो चली है। पहले हिंदी फिल्मों में गालियां स्किप कर दी जाती थी लेकिन अब ऐसा नही है। अश्लील गालियों के बीच वार्ड गली मोहल्ले सब चुनावी सामग्री से अटे हुए है। वार्डो में एक तरफ बिजली व अन्य कंपनियों के तारों के जाल तो दूसरी तरफ होर्डिंग, बैनर ने हालात खराब कर दी है। चुनाव के बाद इन्हें हटाएगा कौन?

