Thar पोस्ट न्यूज। राजस्थान सरकार प्राइवेट स्कूल के प्रतिनिधियों के साथ मिलकर एक कमेटी बना रही है‌  इस कमेटी में बच्चों के माता-पिता को भी शामिल किया जा रहा है।  कमेटी और सरकार मिलकर स्कूल की फीस तय करेगी। ये भी तय किया गया है कि बच्चों के अभिभावक स्कूल के बाहर से यूनिफॉर्म और बुक्स खरीद सकते हैं। कई प्राइवेट स्कूल में कक्षा 8 तक के बच्चों का कोर्स ही 10 हजार सालाना तक का है। वहीं स्कूल यूनिफार्म के 5 हजार तक देने पड़ते हैं।


राजस्थान के माध्यमिक शिक्षा विभाग के डायरेक्टर आशीष मोदी के अनुसार- निजी स्कूलों के लिए गाइडलाइन तैयार की है। स्कूलों को अपनी फीस, बुक्स , यूनिफार्म के बारे में राजस्थान प्राइवेट स्कूल पोर्टल पर जानकारी देनी होगी। इस पोर्टल पर स्कूल की मासिक फीस से लेकर सालाना फीस के बारे में जानकारी देनी होगी। फीस के नाम पर किन-किन वस्तुओं के या सुविधाओं के दाम लिए जा रहे हैं उनके बारे में भी पूरी जानकारी देनी होगी ।अगर कोई माता-पिता अपने बच्चों के लिए वह सुविधा या वस्तुएं नहीं लेना चाहते तो स्कूल वाले उन्हें बाध्य नहीं कर सकेंगे।

प्राइवेट स्कूलों में फीस


आशीष मोदी ने कहा कि स्कूल में फीस और अन्य खर्चों का निर्धारण फिलहाल हम 3 साल के लिए कर रहे हैं । किसी भी स्कूल ने तय फीस के अलावा अगर फीस ली है तो माता-पिता पोर्टल पर शिकायत कर सकते हैं । ऐसे स्कूल के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। डायरेक्टर मोदी ने यह भी कहा कि किसी भी तरह का छुपा हुआ खर्च फीस में शामिल नहीं किया जाएगा। अब स्कूलों में हर महीने स्टूडेंट के माता-पिता और टीचर्स की मीटिंग होगी । जो भी कोर्स मंगाया जाएगा वह राजस्थान सरकार या भारत सरकार से अनुमोदित होगा। पेन , पेंसिल,  कलर या अन्य चीजों के अतिरिक्त दाम नहीं लिए जा सकेंगे।

दबाव बनाना लापरवाही

स्कूलों में बच्चों के ऊपर शारीरिक या मानसिक दबाव बनाना घोर लापरवाही की श्रेणी में गिना जाएगा।‌ बच्चों के लिए खास तौर पर फीमेल स्टूडेंट और स्टाफ के लिए प्रोपर इंतजाम रखना होंगे। अगर किसी स्कूल के खिलाफ माता-पिता शिकायत करते हैं तो इसका हल 3 से 5 दिन में करना होगा । ऐसा नहीं करने पर स्कूल संचालक के खिलाफ एक्शन लिया जाएगा।