ताजा खबरे
हनुमानगढ़ में टायर फेक्ट्री में लगी भीषण आग ,लाखों का सामान जलावक्फ एक्ट सेक्शन 40 आखिर है क्या ?बीकानेर में तीन दिवसीय रामलीला शुक्रवार सेखाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री श्री सुमित गोदारा ने की अमृत 2.0 के कार्यों की प्रगति समीक्षाकिसानों को मिले सस्ती बिजली, निर्बाध हो आपूर्ति –श्री अंशुमान सिंह भाटीअनियमितताएं पाए जाने पर 17 मेडिकल स्टोर्स के अनुज्ञापत्र निलंबित, एक निरस्तबीकानेर में वाहन की टक्कर से युवक की मौतबिजली बंद का असर 4 घंटे तक रहेगाबीकानेर : मेडिकल कॉलेज प्राचार्य को वरिष्ठ प्रदर्शकों ने सौंपा ज्ञापनसमस्या से समाधान की ओर’ कार्यक्रम में राठी ने एसोसिएट संस्थाओं के साथ बैठक ली
IMG 20201126 WA0107 कोविड हाॅस्पिटल में मिला बेहतर इलाज, अब सभी स्वस्थ Bikaner Local News Portal बीकानेर अपडेट
Share This News

एक ही परिवार के पांच सदस्य हुए पाॅजिटिव, इनमें 87 साल की मां भी शामिल
Tp न्यूज़।।कोविड हाॅस्पिटल में मिला बेहतर इलाज, अब सभी स्वस्थ
अच्छी व्यवस्थाओं को लेकर सरकार और प्रशासन का जताया आभार
‘एमसीएच और सुपर स्पेशिएलिटी ब्लाॅक में डाॅक्टर नियमित रूप से देखने आते थे। चिकित्सकों एवं नर्सिंग कर्मियों के समर्पित भाव के कारण हमारे परिवार के सभी पांच सदस्य स्वस्थ होकर वापस लौटे हैं। कोविड हाॅस्पिटल की व्यवस्थाओं ने हमें बहुत प्रभावित किया। हम सरकार और प्रशासन का हृदय से आभार जताते हैं।
यह कहना है नोखा महाविद्यालय के एसोशिएट प्रोफेसर डाॅ. प्रकाश चंद्र आचार्य का। उन्होंने बताया कि 9 नवंबर को उनके परिवार के सभी पांच सदस्य कोरोना पाॅजिटिव पाए गए। इनमें उनकी 87 वर्षीया माताजी चंद्रा देवी आचार्य भी शामिल थी। सभी को 9 नवंबर को एमसीएच विंग में भर्ती किया गया। उनकी माताजी का आॅक्सीजन लेवल कम होने लगा तो 11 नवंबर को उन्हें सुपर स्पेशिएलिटी ब्लाॅक में शिफ्ट कर दिया गया। डाॅ. प्रकाश और उनके पुत्र श्रीवल्लभ आचार्य को भी वहीं भेजा गया। वहीं बाकी दो सदस्य 18 नवंबर तक एमसीएच विंग में ही रहे।
डाॅ. आचार्य ने बताया कि दोनों ही अस्पतालों में साफ-सफाई अच्छी थी। डाॅक्टर नियमित रूप से चैकअप के लिए आते। परिवार के सभी सदस्यों ने दोनों स्थानों पर सहज महसूस किया। डाॅ. आचार्य के दोनों पुत्र बैंगलोर में इंजीनियर हैं। वर्क फाॅर्म होम के कारण इन दिनों अपने घर आए हुए हैं। उनके बड़े पुत्र श्रीवल्लभ आचार्य ने बताया कि पहले-पहले उन्हें बहुत डर लगा लेकिन डाॅक्टरों ने नियमित रूप से उनकी जांच की और मार्गदर्शन किया। इससे धीरे-धीरे आत्मविश्वास लौटने लगा।
डाॅ. आचार्य के दूसरे पुत्र इंजी. श्रीनिकेत आचार्य ने बताया कि चिकित्सक सुबह, शाम और देर रात तीनों शिफ्ट में आते। स्टाफ एक्टिव था। आवश्यक दूरी रखी गई। साफ सफाई भी नियमित रूप से होती रही। वहीं डाॅ. आचार्य की पत्नी तरुणा आचार्य ने चिकित्सालय स्टाफ को हैल्पफुल बताया। उन्होंने कहा कि बाथरूम साफ-सुथरे थे। उन्हें किसी प्रकार की परेशानी नहीं हुई। उन्होंने कहा कि परिवार के सभी सदस्यों के एक साथ पाॅजिटिव रिपोर्ट होने, माताजी की उम्र अत्यधिक होने और दोनों पति-पत्नी के डायबिटिक होने के कारण मन में अजीब सा डर बैठ गया, लेकिन अस्पताल में कार्यरत चिकित्सकों एवं स्टाफ सदस्यों के सेवा भाव के कारण सभी स्वस्थ होकर लौट आए हैं।


Share This News