Thar पोस्ट न्यूज। भारत-पाकिस्तान में विभाजन का दर्द सीने में दबाकर वह भारत आ गया। लाखों लोगों को अपना घरबार छोड़कर शरणार्थी बनना पड़ा। एक शख्स जूनूनी था। जो सियालकोट से दिल्ली आया और जीवनयापन के लिए तांगे पर रखकर मसाला बेचने लगा। मसाले की कागजी पुड़िया मशहूर होने लगी। सिलसिला चलता रहा और रसोई का मसाला बिकता रहा। समस्याएं आती गई। लेकिन मेहनत और जज्बे से करोड़ो रुपये की मसाला कंपनी खड़ी कद दी. एक कैसे तांगेवाले धर्मपाल गुलाटी ने तमाम मुश्किलों का सामना करते हुए देश दुनिया में अपनी पहचान बनाई और कहलाए मसाला किंग। दरअसल मसाला किंग नाम से मशहूर धर्मपाल गुलाटी 27 मार्च 1923 को सियालकोट (वर्तमान में पाकिस्तान) में जन्में थे. पढ़ाई में रुचि बिल्कुल ही नहीं थी. इसलिए सिर्फ पांचवीं तक ही पढ़े थे. महज 14 साल की उम्र में अपने पिता के साथ कारोबार शुरू कर दिया. साबुन, कपड़ा और चावल का कारोबार करते-करते उनके पिता चुन्नी लाल गुलाटी ने ‘महाशयां दी हट्ट’ (MDH) की स्थापना की. उस वक्त उन्हें देगी मिर्च वाले के नाम से जाना जाता था।1947 में भारत-पाकिस्तान विभाजन के समय लाखों लोगों की तरह धर्मपाल गुलाटी को भी दिल्ली आना पड़ा. कहा जाता है कि धर्मपाल गुलाटी पाकिस्तान से दिल्ली सिर्फ 1500 रुपये लेकर आए थे. उन्होंने दिल्ली में तांगे पर रखकर मसाला बेचना शुरू किया. इसके बाद कुछ पैसे कमाकर दिल्ली के करोलबाग में मसाले की एक छोटी सी दुकान खोली. इस तरह धीरे-धीरे वह मसाला किंग बन गए. उनका एमडीएच मसाला देश-दुनिया में फेमस है.धर्मपाल गुलाटी साल 2017 में भारत के सबसे अधिक वेतन पाने वाले सीईओ बने थे. बताया जाता है कि वह अपनी सैलरी का करीब 90 फीसदी दान कर दिया करते थे. उनकी नेटवर्थ करीब 5 हजार करोड़ बताई जाती है। वे प्रत्येक कार्य कुछ हटकर करते थे। कुछ वर्ष पहले बीकानेर के लालगढ़ पैलेस में वे पत्रकारों से रूबरू होने से पहले हाथी पर बैठकर आये।