Thar पोस्ट, न्यूज। हाल ही में बाघों के संरक्षण की शुरू हुई मुहिम को पचास वर्ष पूरे हो गए है। हालांकि इन अवधि में बाघों की संख्या जिस तेजी से बढ़ी है, वह देश के लिए खुश होने का एक बड़ा मौका हो सकता है। लेकिन इनके बढ़ने की जो रफ्तार है, वह वन्यजीव वैज्ञानिकों की चिंता भी बढ़ा रही है, क्योंकि देश में बाघों के लिए संरक्षित वन क्षेत्र (टाइगर रिजर्व ) की अभी जो क्षमता है, वह पांच हजार बाघों के रहने की है। रफ्तार यही रही तो केवल 10 वर्ष में सारे रिज़र्व भर जाएंगे।बाघों के बढ़ने की रफ्तार ऐसी ही रही, तो अगले दस सालों में देश के बाघों के लिए संरक्षित सारा वन क्षेत्र (रिजर्व) भर जाएगा। वर्तमान समय में देश में बाघों की आबादी सालाना छह फीसद की रफ्तार से बढ़ रही है। जिसके और बढ़ने की उम्मीद है।संरक्षण को लेकर यह स्थिति तब है, जब देश में इसके संरक्षित वन क्षेत्रों में भी लगातार बढ़ोत्तरी की जा रही है। एक अप्रैल, 1973 को बाघों के संरक्षण का यह प्रोजेक्ट जब शुरू किया था, उस समय में देश में बाघों के लिए सिर्फ नौ संरक्षित वन क्षेत्र ही थे।करीब 18 हजार वर्ग किमी का था, जबकि मौजूदा समय में देश में बाघों के संरक्षित वन क्षेत्रों की संख्या 53 हो गई है, जिनका क्षेत्रफल भी 75 हजार वर्ग किमी का हो गया है। इनमें कोर एरिया भी 41 हजार वर्ग किमी का है। जिसमें वर्ष 2018 की गणना के मुताबिक 2967 बाघ है।

वन्य जीव विशेषज्ञों के मुताबिक, यदि वर्ष 2018 की गणना के आधार पर ही बाघों की संख्या का अनुमान लगाए, तो देश में इनकी संख्या जिस तरह से सालाना छह फीसद की रफ्तार से बढ़ रही है, उनमें हर साल बाघों के कुनबे में 180 नए बाघ जुड़ रहे है।ऐसे में अगले दस सालों में देश में इनकी संख्या पांच हजार से अधिक हो जाएगी। फिलहाल बाघों की बढ़ती आबादी के बेहतर प्रबंधन के लिए वन्यजीव विशेषज्ञों और भारतीय वन्यजीव संस्थान ने मंथन भी शुरू कर दिया है। जिसमें इनके लिए और नए ठिकाने तैयार करना है। -अरविंद पांडेय