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IMG 20241023 101608 7 24 साल के आईआईटी इंजीनियर ने 18 लाख की नौकरी छोड़ चुना वैराग्य Rajasthan News Portal राजस्थान
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 Thar पोस्ट। गुजरात व राजस्थान के दो युवाओं ने कम उम्र में ही संयम और आध्यात्मिक जीवन का रास्ता चुना है। गुजरात के सूरत में रहने वाले 12 वर्षीय जहान बेताला ने जैन दीक्षा लेने का निर्णय किया है। राजस्थान के मूल निवासी जहान 18 जनवरी 2027 को लाडनूं स्थित जैन विश्व भारती परिसर में आचार्य श्री महाश्रमणजी से दीक्षा ग्रहण करेंगे। दूसरी ओर, राजस्थान के केकड़ी क्षेत्र के जूनिया गांव के 24 वर्षीय आईआईटी इंजीनियर गौरव जैन ने गुरुग्राम में 18 लाख रुपये के वार्षिक पैकेज वाली नौकरी छोड़कर आजीवन ब्रह्मचर्य का व्रत धारण किया है। उन्होंने अपने गुरु मुनिपुंगव श्री सुधासागरजी महाराज के संघ में शामिल होने का निर्णय लिया है। केकड़ी क्षेत्र के जूनिया गांव निवासी 24 वर्षीय गौरव जैन ने भी सांसारिक जीवन से अलग संयम का मार्ग चुना है।

राकेश जैन के बड़े बेटे गौरव गुरुग्राम की एक मल्टीनेशनल कंपनी में 18 लाख रुपये के वार्षिक पैकेज पर कार्यरत थे। आईआईटी से इंजीनियरिंग की शिक्षा प्राप्त करने वाले गौरव पढ़ाई में होशियार होने के साथ खुशमिजाज और मिलनसार स्वभाव के भी रहे हैं। उन्हें धार्मिक संस्कार परिवार से मिले। अब उन्होंने करियर और आर्थिक सफलता के बजाय आध्यात्मिक जीवन को प्राथमिकता दी है।
परिवार की मानें तो गौरव के वैराग्य की शुरुआत वर्ष 2015 में हुई, जब दिगंबर जैन संत मुनिपुंगव श्री सुधासागरजी महाराज ने उनके ननिहाल गुलगांव में गुणोदय अतिशय तीर्थ क्षेत्र की नींव रखी। उसी दौरान गौरव ने पहली बार मुनिश्री के दर्शन किए और उन्हें अपना गुरु मान लिया। वह नियमित रूप से उनके प्रवचन सुनते और जिज्ञासा समाधान के माध्यम से धर्म के प्रति उनकी आस्था और मजबूत होती गई।

उच्च शिक्षा के लिए जयपुर के प्रताप नगर में रहने के दौरान भी गौरव प्रतिदिन साइकिल से सांगानेर स्थित श्री संघीजी मंदिर पहुंचते थे। वहां देवदर्शन और भगवान का अभिषेक करने के साथ उन्होंने शुद्ध-सात्विक भोजन करने का नियम भी बनाए रखा।


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