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Thar पोस्ट न्यूज (विशेष)। बीकानेर की होली न केवल रम्मत, ख्याल, नॉटंकी लोकगीतों बल्कि अपने अश्लील गीतों के कारण भी प्रसिद्ध है। हाल ही के वर्षों में इस बात पर कुछ विवाद भी हुए हैं। बीकानेर परकोटे में एक विशेष स्थान में गाये जाने वाले होली के गीत स्थानीय लोगों के विरोध के कारण बन्द कर दिए गए है। लेकिन इसके बाद भी होली के अश्लील गीतों में कोई कमी नहीं आई है। बीकानेर के परकोटे में आपसी सम्बधों की वजह से इन गीतों की रचनाओं में ‘सगा-सगी’ ही केंद्र में होते है। सगी पर गीत अधिक बनते है। कुछ गीत you tube पर भी है बीकानेर खुला फागण आदि के नाम से। खैर मुख्य विषय पर आते है। अश्लील गीतों को लेकर मैंने बीकानेर के परकोटे के अनेक विद्जनों गुणीजनों से विस्तार से बात की। अधिकांश का यही कहना था कि ‘प्राचीन समय मे जब बीकानेर में शिक्षा कम थी। किशोर लड़के लड़कियों के लिए वर्तमान समय की तरह कोई यौन शिक्षा का पाठ्यक्रम नहीं था। बड़े बुजुर्ग भी अपने बच्चों व परिजनों के बच्चों को किसी तरह का ज्ञान देने में संकोच करते थे तब इस रंगीले त्योंहार में अश्लील गीतों का पुट डाला गया ताकि युवा होते बच्चों को जो बात नही कही जा सके वो गीतों के जरिये कह दिया जाए। मजे की बात यह है कि होली पर्व समाप्त होते ही अश्लील गीत भी फिजां से गायब, बुजुर्ग भी अश्लील गीतों को टोक दिया करते थे। इस तरह गीत भी परंपरा में शामिल हो गए।” इसके विपरीत एक तबका यह भी है जो यह मानता है कि इन गीतों का समाज मे गलत असर पड़ता है। हालांकि इनकी संख्या कम ही है। अधिकांश का मानना है कि बीकानेरी होली का जो फॉर्मेट सदियों से चल रहा है वह ही उचित है। वीर, श्रृंगार प्रेम रस से भरी रम्मत, नोटंकी, गीतों की रंगत से ही बीकानेरी होली को अलग पहचान बनी हुई है।


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