Thar पोस्ट। लोकसभा में शादियों में होने वाली बर्बादी को रोकने के लिए बिल पास किया गया है। देश में किसी औसत आय वाले व्यक्ति के घर में भी शादी होती है तो लाखों का खर्च हो जाता है। यही शादी किसी अपर मिडिल क्लास फैमिली में होता है तो ये खर्च करोड़ों में हो जाता है। लेकिन अब शायद भविष्य में ऐसा ना हो पाए। लोकसभा में हाल में एक नया बिल पेश हुआ है जिसे चर्चा के लिए रखा गया है। कांग्रेस के एक सांसद ने संसद के मानसून सत्र में एक विधेयक पेश किया है, जिसमें शादियों में होने वाले खर्चों पर लगाम लगाने की बात कही गई है। कांग्रेस सांसद जसबीर सिंह गिल ने लोकसभा में जो प्राइवेट मेंबर बिल पेश किया, उसके अनुसार बरात में सिर्फ 50 लोग ही शामिल हो पाएंगे। साथ ही इसके तहत शादी में 10 से अधिक व्यंजनों को नहीं परोसा जा सकेगा। शगुन या उपहार के रूप में भी 2500 रुपये से अधिक नहीं दिए जा सकने का प्रावधान है।

बिल में क्या है ? इस बिल का नाम है ‘विशेष अवसरों पर फिजूलखर्ची रोकथाम विधेयक 2020‘। यह बिल जनवरी 2020 में कांग्रेस सांसद जसबीर सिंह गिल ने पेश किया था। संसद में अब इसी बिल को चर्चा के लिए रखा गया है। इस बिल में प्रावधान है कि शादी में दूल्हा और दुल्हन दोनों के परिवारों से आमंत्रित मेहमानों की संख्या 100 से अधिक नहीं होनी चाहिए। वहीं शादी में परोसे गए व्यंजनों की संख्या भी 10 से अधिक नहीं होनी चाहिए। जबकि नवदंपत्ति को दिए गए उपहारों का मूल्य 2,500 रुपये से अधिक नहीं होना चाहिए। यदि यह बिल अगर पास हो गया तो बहुत से परिवार उस खर्च के बोझ से बच जाएंगे जो उन्हें ना चाहते हुए भी समाज को देखते हुए करना पड़ता है। ग़ौरतलब है कि भारत का एक बड़ा तबका शादी के नाम पर दिखावा करता है। अपने रिश्तेदारों व अन्य सेलिब्रिटी को देखकर व्यापक स्तर पर विवाह में खर्च करता है। चंद रसूखदार लोगों पर इसका कोई ज्यादा असर नही होता। लेकिन भारतीय समाज का एक बड़ा तबका इससे प्रभावित होता है। पिछले कुछ वर्षों से सोशल मीडिया पर शादी में होने वाली बर्बादी के फोटो वीडियो वायरल होने के बाद अब इस विषय पर विचार किया जाने लगा है। यदि यह बिल पास हो जाता है तो देश के करोड़ो लोगो को इससे राहत मिलेगी। जानकारी में रहे कि यूरोपीय व अमेरिकी देशों में होने वाली शादियों में सीमित संख्या में ही मेहमानों को आमंत्रित किया जाता है तथा व्यंजनों की संख्या कम ही होती है।