Thar पोस्ट न्यूज। कुछ समय के बाद एक बार फिर मॉनसून सक्रिय हो रहा है। मौसम विभाग ने रिपोर्ट जारी कर बताया कि 26 जुलाई से प्रदेश में फिर से भारी वर्षा का दौर शुरू होगा। इसके साथ ही सरकार ने वर्षा जनित हादसों को देखते हुए आपदा प्रबंधन की तैयारियों की समीक्षा की है। सर्वाधिक वर्षा प्रभावित वाले जिलों में NDRF और SDRF की 8 कंपनियां तैनात कर दी गई हैं। इनमें NDRF की 4 टीमें किशनगढ़ (अजमेर), कोटा, भरतपुर एवं उदयपुर में तैनात की गई हैं, जो उस संभाग विशेष टीमों के साथ संयोजन करके बाढ़ बचाव एवं आपदा प्रबंधन में सहयोग कर रही हैं।

राजधानी जयपुर में राज्य आपातकालीन परिचालन नियंत्रण कक्ष (एसईओसी) संचालित किया जा रहा है जिसके टोल फ्री नंबर 1070 व 112 हैं। सभी जिलों में बाढ़ नियंत्रण कक्षों को 24 घंटे सक्रिय रहने के आदेश जारी किए गए हैं। प्रत्येक प्रभावित जिले को बाढ़ बचाव एवं राहत गतिविधियों हेतु संभाग स्तरीय जिला मुख्यालयों को 20-20 लाख रुपये तथा अन्य जिलों को 10-10 लाख रुपये की अग्रिम राशि स्वीकृत की गई है। प्राकृतिक आपदा से मृत्यु होने पर प्रति व्यक्ति 4.00 लाख रुपये, मकान पूर्ण रूप से क्षतिग्रस्त होने पर 1.20 लाख रुपये, बडे़ दुधारू पशु क्षति होने पर 37,500 रुपये प्रति पशु (अधिकतम 03) व छोटे दुधारू पशु क्षति होने पर 4,000 रुपये प्रति पशु (अधिकतम 30) तथा बोये गये असिंचित क्षेत्र में खराबा (33 प्रतिशत या उससे अधिक) होने पर प्रति हैक्टेयर 8,500 रुपये व बोये गये सिंचित क्षेत्र में खराबा (33 प्रतिशत या उससे अधिक) होने पर प्रति हैक्टेयर 17,000 रुपये एवं बहुवर्षीय फसलों में खराबा (33 प्रतिशत या उससे अधिक) होने पर प्रति हैक्टेयर 22,500 रुपये की तत्काल सहायता देने का प्रावधान एसडीआरएफ (राज्य आपदा मोचन कोष) के अन्तर्गत है।