





Thar पोस्ट न्यूज। राजस्थान में खेजड़ी काटने के विरोध में आंदोलन जोर पकड़ रहा है। बीकानेर में मंगलवार सुबह गुरु जंभेश्वर भगवान की विधिवत पूजा-अर्चना के बाद 363 लोगों ने अनशन शुरू किया। इनमें 29 साधु-संत, 29 महिलाएं और 305 पुरुष शामिल हैं। संत-महात्माओं की बड़ी भागीदारी के साथ महिलाओं की सक्रिय उपस्थिति आंदोलन को और मजबूती दे रही है। आपको बता दे कि सोमवार देर रात प्रदर्शनकारियों ने पॉलिटेक्निक कॉलेज से पैदल व वाहनों से कलेक्ट्रेट परिसर पहुंचे लेकिन पुलिस ने उन्हें आगे बढ़ने से रोक दिया। रात भर कई लोग टेंट में सोए, जबकि कुछ ने जागरण किया। बिश्नोई धर्मशाला छोटी पड़ गई, जिससे सैकड़ों लोग खुले में टेंट लगाकर ठहरे रहे। बीकानेर का जिला प्रशासन पूरी तरह अलर्ट है। कलेक्ट्रेट परिसर में एसटीएफ सहित भारी पुलिस बल तैनात किया गया है। आंदोलन से जुड़े नेताओं से लगातार बातचीत चल रही है लेकिन प्रदर्शनकारी डटे हुए हैं। यह आंदोलन सोलर प्रोजेक्ट्स के नाम पर खेजड़ी की अंधाधुंध कटाई के विरोध में तेज हुआ है जो पर्यावरण और पारंपरिक जीवनशैली के लिए खतरा बना हुआ है। महापड़ाव के समर्थन में पूर्व सीएम वसुंधरा राजे उतर आईं हैं। उन्होंने मंगलवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, ‘सिर सांठे रूंख रहे तो भी सस्तो जाण’, खेजड़ी साधारण पेड़ नहीं, यह हमारे लिए देववृक्ष है। जो हमारी आस्था और भावनाओं से जुड़ा है। हमारे यहां खेजड़ी की पूजा की जाती हैं। मैं स्वयं भी खेजड़ी की पूजा करती हूं। जिसकी हम पूजा करें, उस देवता का संरक्षण हमारा दायित्व है। राजनीति से ऊपर उठकर हमें इसके संरक्षण के लिए आगे आना चाहिए। इसे बचाना चाहिए। मैं खेजड़ी और ओरण (गौचर भूमि) को बचाने की मुहिम में सबके साथ हूं।




