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IMG 20260317 120124 पर्यटन : कैमल सफारी पर मंडराता खतरा ! Rajasthan News Portal बीकानेर अपडेट
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Thar पोस्ट न्यूज। रेगिस्तान का जहाज वर्तमान मेंं अहिस्ता-अहिस्ता डूब रहा है। इसके लिए सरकारी स्तर पर किए गए प्रयास भी बौने साबित हो रहे हैं। अब तो कैमल सफारी भी खतरे में है। वर्तमान में ऊंट की उपयोगिता पर नए सिरे से मंथन करना होगा। ऊंट प्रत्येक जलवायु मेंं जल्दी रच-बस जाता है। यदि अन्य कार्यों मेंं इसका अधिक से अधिक इस्तेमाल होगा तो न केवल इसकी गिरती संख्या पर लगाम लगेगी, बल्कि इसका पालन में अधिक से अधिक हो सकेगा। ऊंटों के लिए राज्य में अभयारण्य बनाकर भी इसकी संख्या में इजाफा किया जा सकता है। सरकारी स्तर पर भी इसके प्रोत्साहन की आवश्यकता है।  भले ही ऑस्ट्रेलिया में ऊंटों की संख्या बेतहाशा बढ़ी हो, और यह प्राणी वहां की सरकार के लिए सिरदर्द साबित हो रहा हो, लेकिन राजस्थान मेंं इसकी घटती संख्या ने न केवल राज्य सरकार बल्कि  केन्द्र सरकार के आला अधिकारियों को बेचैन कर रखा है। 

राज्य सरकार ने ऊंट को राजकीय पशु घोषित किया हुआ है ताकि इसकी गिरती संख्या पर लगाम लगाई जा सके। हालांकि पिछले दस वर्षों से इसकी गिरती संख्या को लेकर अनेक योजनाएं बन चुकी है, किन्तु तमाम प्रयासों केे बावजूद इनकी संख्या लगातार कम हो रही है। इसकी वजह है इसकी पारम्परिक उपयोगिता का कम होना। पहले ऊंट को खेतों में व गाड़ों में इस्तेमाल किया जाता था, लेकिन वर्तमान मेंं स्थितियों व परिस्थितियां तेजी से बदल रही है। खेतों में ऊंटों का कार्य सीमित हो रहा है वहीं शहरों में बोझ ढोने केे लिए अन्य संसाधनों का इस्तेमाल किया जाने लगा है। इसके चलते ऊंट बदलते परिवेश की पट्टिका पर फिसलने लगा है। 
उपयोगिता बढ़ेगी, जीवन बचेगा

ऊंट की उपयोगिता अन्य कार्यों में बढ़ाने से ऊंट की संख्या में तेजी से इजाफा हो सकता है। न केवल इजाफा होगा, बल्कि इसकी मांग भी बढ़ेगी। रेगिस्तान के जहाज की उपयोगिता को कैमल सफारी द्वारा बढ़ाया जा सकता है। हालांकि सरकार की ओर से कैमल सफारी को बढ़ावा देने के लिए कोई योजना नहीं बनाई गई है।              

camel पर्यटन : कैमल सफारी पर मंडराता खतरा ! Rajasthan News Portal बीकानेर अपडेट

अभी तक निजी व्यवसाइयों द्वारा किए जा रहे प्रयासों से ही कैमल सफारी को बढ़ावा मिल सका है। बीकानेर में रायसर, पिथरासर, ढिंगसरी, रासीसर के अलावा जैसलमेर केे सम, खुड़ी आदि रेगिस्तान में कैमल सफारी करवाई जाती है लेकिन ऊँट कम होने से वहां भी असर हो रहा है। इसके अलावा शादी-विवाह, वीआईपी विजिट, नए उद्घाटन, अन्तरराष्ट्रीय कैमल फेस्टिवल, कोलायत मेला सहित अनेक आयोजनों में सजे-धजे ऊंट काम में लिए जाते हैं। 

कैमल मिल्क की अहम् भूमिका
रेगिस्तान के जहाज को बचाने मेंं कैमल मिल्क की भी अहम भूमिका हो सकती है। कैमल मिल्क में उपलब्ध पौष्टिक तत्वों के बारे मेंं अधिक से अधिक आमजन को बताए जाने से दूध की खपत बढ़ेगी। इससे ऊंटों की संख्या में भी इजाफा होगा। अभी तक राइका जाति मेंं ही ऊंट के दूध का इस्तेमाल किया जाता है। जबकि कैमल मिल्क मधुमेह, घुटनोंं के दर्द सहित अन्य रोगों में कारगर है।

 राजस्थान को छोड़ अन्य प्रान्तों व विदेशों मेंं कैमल मिल्क लोकप्रिय हो रहा है। सरकारी स्तर पर इस दिशा में व्यापक स्तर पर कार्य किए जाने की आवश्यकता है। कैमल मिल्क सुपर फूड माना गया है। सरकार इसे अनिवार्य करती है तो इससे निश्चित तौर पर ऊंंटों की संख्या में इजाफा हो सकेगा। राजस्थान के सादड़ी इलाके मेंं एक गैर सरकारी संगठन ऊंटों के संरक्षण के लिए कार्य कर रहा है इसी तरह अन्य संगठनों को भी सरकार जोड़कर कार्य कर सकती है। वर्तमान मेंं ऊंटोंं के आभूषण, आर्टिफिशियल ज्वैलरी व्यवसाय मेंं लोकप्रिय हो रहे हैं। लघु उद्योग को बढ़ावा देकर इसकी उपयोगिता और बढ़ाई जा सकती है। उपयोगिता बढऩे पर ही ऊंटों की संख्या तेजी से बढ़ेगी।

इसलिए घट रही है संख्या
दरअसल ऊंटों की संख्या गिरने की वजह है इसकी उपयोगिता को अन्य कार्यों में नहीं बढ़ाया जा रहा। इसे केवल परम्परागत मेले एवं खेतों मेंं उपयोगिता तक ही सीमित रखा जा रहा है। इसके अलावा गांवों में भी मशीनों की संख्या बढऩे से ऊंटोंं की जान पर बन आई है। ऊंटोंं के लिए नए सिरे से चारागाह भी विकसित करने होंगे। 
बन सकता है ऊंट अभयारण्य
राजस्थान में ऊंटोंं की संख्या बढ़ाने के लिए इसके लिए अलग से अभयारण्य भी बनाया जा सकता है, जहां अधिक से अधिक ऊंटों की संख्या को बढ़ाया जा सकता है। ऊंटोंं का अभयारण्य एक पर्यटन स्थल भी बन सकता है। यूरोपीय देशों मेंं ऊंट नहीं होते। लेकिन यदि इसके लिए अभयारण्य शुरू कर टिकट निर्धारित किया जाता है तो न केवल सरकार के राजस्व मेंं इजाफा होगा बल्कि राजस्थान मेंं एक नया टूरिस्ट डेस्टिनेशन भी बनेगा। 

 The number of camels will increase rapidly as utility increases. So the number is decreasing, in fact the number of camels is falling because its utility is not being extended to other works. It is being limited to utility in traditional fairs and fields only. Apart from this, due to increase in the number of machines in the villages, camels have become life-threatening. Fresh pastures will also have to be developed for camels. Can be made Camel Sanctuary To increase the number of camels in Rajasthan, a separate sanctuary can also be created, where the maximum number of camels can be increased.  Camel sanctuary can also become a tourist destination. There are no camels in European countries. But if the ticket is set by starting the sanctuary for this, not only will the revenue of the government increase but a new tourist destination will also be formed in Rajasthan


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