





Thar पोस्ट न्यूज। एस जी जे एस एस का दस दिवसीय बकरी पालन प्रशिक्षण कार्यक्रम आरंभ हुआ।
वैज्ञानिक पद्धति अपनाने पर बकरी पालन ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ बन सकता है – डॉ. निर्मला सोनी
प्रशिक्षण कार्यक्रम ग्रामीण विकास के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण – रमेश तांबिया, नाबार्ड,डी डी एम





बीकानेर। ग्रामीण आजीविका सशक्तिकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए श्री गुरु जम्बेश्वर सेवा संस्थान द्वारा नाबार्ड के सहयोग से संचालित 10 दिवसीय बकरी पालन प्रशिक्षण कार्यक्रम रायसर में आरंभ हुआ। यह कार्यक्रम ग्रामीण किसानों, पशुपालकों एवं युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने तथा बकरी पालन को एक लाभकारी उद्यम के रूप में विकसित करने के उद्देश्य से आयोजित किया गया ।
कार्यक्रम का उद्घाटन समारोहपूर्वक हुआ, जिसकी अध्यक्षता डॉ. निर्मला सोनी, संस्था हेड (CSWRI) ने की। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में डॉ. चेतन पाटिल (एग्रीकल्चर एक्सटेंशन विशेषज्ञ), डॉ. सुमनील महावार, तथा रमेश तांबिया ( डी डी एम नाबार्ड, बीकानेर) उपस्थित रहे। इसके अतिरिक्त, संस्थान के सचिव धर्मपाल बिश्नोई सहित क्षेत्र के अनेक गणमान्य नागरिक, किसान एवं प्रशिक्षार्थी बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।
इस 10 दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में आय के स्थायी स्रोत विकसित करना, किसानों को आधुनिक पशुपालन तकनीकों से परिचित कराना तथा बकरी पालन को वैज्ञानिक एवं व्यावसायिक दृष्टिकोण से स्थापित करना है। वर्तमान समय में बकरी पालन न केवल छोटे एवं सीमांत किसानों के लिए एक सुलभ विकल्प है, बल्कि यह कम निवेश में अधिक लाभ प्रदान करने वाला व्यवसाय भी साबित हो रहा है।
डॉ. निर्मला सोनी ने इस अवसर पर कहा कि बकरी पालन ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ बन सकता है, यदि इसे वैज्ञानिक पद्धति से अपनाया जाए। उन्होंने बताया कि CSWRI जैसे संस्थान लगातार अनुसंधान एवं नवाचार के माध्यम से पशुपालकों को बेहतर नस्ल, पोषण एवं रोग प्रबंधन की जानकारी उपलब्ध करा रहे हैं।
डॉ. चेतन पाटिल ने अपने संबोधन में कृषि एवं पशुपालन के समन्वित विकास पर जोर देते हुए कहा कि यदि किसान फसल उत्पादन के साथ-साथ पशुपालन को भी अपनाते हैं, तो उनकी आय में उल्लेखनीय वृद्धि हो सकती है। उन्होंने प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को सक्रिय भागीदारी के लिए प्रेरित किया।
डॉ. सुमनील महावार ने बकरी पालन में स्वास्थ्य प्रबंधन, टीकाकरण एवं रोग नियंत्रण के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि सही समय पर उचित देखभाल एवं चिकित्सा उपाय अपनाकर पशुधन की उत्पादकता को बढ़ाया जा सकता है।
रमेश तांबिया ( डीडीएम, नाबार्ड, बीकानेर) ने विभिन्न योजनाओं का उल्लेख करते हुए बताया कि संस्था द्वारा चलाए जा रहे इस प्रकार के प्रशिक्षण कार्यक्रम ग्रामीण विकास के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने कहा कि नाबार्ड का उद्देश्य किसानों को केवल वित्तीय सहायता प्रदान करना ही नहीं, बल्कि उन्हें तकनीकी ज्ञान एवं कौशल से भी सशक्त बनाना है।
संस्थान के सचिव धर्मपाल बिश्नोई ने सभी अतिथियों एवं प्रतिभागियों का स्वागत करते हुए कहा कि श्री गुरु जम्भेश्वर सेवा संस्थान (SGJSS) लगातार ग्रामीण क्षेत्रों में आजीविका संवर्धन के लिए कार्य कर रहा है। उन्होंने बताया कि संस्थान द्वारा पूर्व में आयोजित प्रशिक्षण कार्यक्रमों से अनेक लाभार्थियों ने सफलतापूर्वक बकरी पालन व्यवसाय शुरू किया है और अपनी आय में वृद्धि की है।
धर्मपाल बिश्नोई ने प्रशिक्षण की रूपरेखा पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह 10 दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम पूरी तरह व्यावहारिक एवं वैज्ञानिक दृष्टिकोण पर आधारित है। प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को उन्नत बकरी नस्लों की पहचान एवं चयन, बकरी शेड (आवास) का वैज्ञानिक निर्माण, संतुलित आहार एवं पोषण प्रबंधन, प्रजनन एवं नस्ल सुधार तकनीक, रोग पहचान, टीकाकरण एवं उपचार,बाजार प्रबंधन एवं विपणन रणनीति, स्वरोजगार एवं उद्यमिता विकास के साथ ही प्रतिभागियों को फील्ड विजिट एवं प्रायोगिक अभ्यास के माध्यम से व्यावहारिक अनुभव भी प्रदान किया जाएगा।
यह प्रशिक्षण कार्यक्रम न केवल व्यक्तिगत स्तर पर आय वृद्धि का माध्यम बनेगा, बल्कि सामुदायिक स्तर पर भी सकारात्मक प्रभाव डालेगा। बकरी पालन से महिलाओं एवं युवाओं को घर के निकट रोजगार के अवसर प्राप्त होंगे,
कार्यक्रम में भाग लेने वाले प्रतिभागियों ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि इस प्रकार के प्रशिक्षण से उन्हें न केवल नई जानकारी प्राप्त होगी, बल्कि वे इसे अपने जीवन में लागू कर आर्थिक रूप से सशक्त बन सकेंगे। कार्यक्रम समापन पर सभी अतिथियों, प्रतिभागियों का आभार व्यक्त किया गया।