





Thar पोस्ट। कहते है होली ब्रज की या फिर बीकानेर की। पहले राधा-कृष्ण के बृज की बात। बृज में पूरे 40 दिन तक होली के आयोजन होते हैं, लेकिन इसमें सबसे प्रमुख नौ दिवसीय रंगोत्सव होता है। यानि 40 दिन तक रंगों का पर्व। कभी फूलों से तो कभी केसर रंग गुलाल से। क्या महिलाएं, क्या पुरूष। सभी होली की रंगत में। इसमे लठमार होली तो विश्व प्रसिद्ध है। पुरुष आतुर रहते प्रेमभरे लट्ठ का स्वाद चखने में। 40 दिन के होली कार्यक्रमों में: 24 फरवरी को नंदगांव में फाग आमंत्रण एवं बरसाना में लड्डू होली… 25 को बरसाना में लठामार होली.. यानी राधारानी रंगीली जी, लाडली जु के बरसाना की गलियां तक रंग फूल, गुलाल पानी में भीग जाती है। 26 को नंदगांव में लठामार होली होगी। 27 फरवरी को श्रीकृष्ण जन्मस्थान मंदिर और श्रीबांके बिहारी मंदिर में रंगों की होली होगी। एक मार्च को द्वारिकाधीश मंदिर में होली, गोकुल में छड़ी मार होली, 3 मार्च को चतुर्वेदी समाज का डोला, 5 को बलदेव के दाऊजी मंदिर में हुरंगा, चरकुला मुखराई, नंदगांव में हुरंगा होगा। 6 मार्च को गांव बठैन और गिडोह का हुरंगा, 9 मार्च को महावन में छड़ीमार होली और 12 को वृंदावन के श्रीरंगजी मंदिर में होली उत्सव होगा. अब बात बीकानेर की। यहां ऐतिहासिक रम्मतों के साथ डोलची खेल, डांडिया, थम्ब पूजन, चंग धमाल सहित अनेक आयोजन होते है। बीकानेर में होली के स्वाद के भी रंग है। अनेक लोकप्रिय व्यंजन के साथ नमकीन की महकार देर रात तक रहती है। होली के दिनों में बीकानेर के भीतरी परकोटे में होली की मस्ती होलिका लगने से घुलण्डी तक चलती है। होली का कैलेंडर जारी हो गया है। इसमे सभी कार्यक्रमों का ब्यौरा है।

