Thar पोस्ट, बीकानेर न्यूज। आप यदि कुछ दिन जोधपुर घूमकर आओगे तो आपको आभास होगा कि बीकानेर की तुलना में जोधपुर में कितना विकास हुआ है। मेरे रिश्तेदार जोधपुर में रहते है और बीकानेर के पिछड़ेपन का जिक्र भी करते हैं। बहरहाल , बीकानेर पिछ्ले कई दिन से पानी-पानी की रट लगा रहा था। पानी घरों में आने की आस बंधी तो इसे जोधपुर भेज दिया गया। आज भारतीय जनता पार्टी शहर जिलाध्यक्ष अखिलेश प्रताप सिंह ने नहरबंदी के बाद पानी को पहले जोधपुर पंहुचाने के फैसले पर कहा कि राजस्थान सरकार और जलदाय विभाग पर बीकानेर संभाग के साथ वादाखिलाफी और सौतेले व्यवहार बताते हुए इसे बीकानेर संभाग क्षेत्र की जनता का अपमान बताया है। उन्होंने कहा कि बीकानेर शहर और देहात के सैंकड़ों गाँव पानी के लिए तरस रहे हैं लेकिन मुख्यमंत्री पहले जोधपुर की जनता को पानी पंहुचाने पर आमादा है।जिलाध्यक्ष अखिलेश प्रताप सिंह ने पूछा कि बीकानेर में 3 मंत्री और अनेको मंत्री का दर्जा प्राप्त जनप्रतिनिधि है लेकिन सभी बीकानेर की जनता का अपमान चुपचाप देखते हुए मौन हैं। हनुमानगढ़, गंगानगर, बीकानेर शहर, देहात, चुरू, नोखा, नागौर, मेड़ता, डीडवाना समेत 25 छोटे बड़े शहर आज समय पर जल आपूर्ति से वंचित किये गए है। इस क्षेत्र के 5 से 6 हज़ार गांवों की स्थिति और भी विकट तथा दयनीय है। इस प्रकार के सौतेले रवैये के कारण बीकानेर की जनता आने वाले चुनावों में ऐसे जनप्रतिनिधियों को सबक अवश्य सिखाएगी।
बीकानेर के लिए जब भी बड़ी योजनाएं बनती है तो विकास की सरिता जोधपुर या जयपुर में बहती है। बीकानेर के प्रति उपेक्षित रवैया अपनाया जाता है जो आज भी कायम है।