Thar पोस्ट, न्यूज। कांग्रेस में राजनीति और गरमा गई है। लेकिन राजनीति का पारा दिल्ली व राजस्थान के बीच झोल खा रहा है। सीएम अशोक गहलोत भी बदलते समीकरणों को देखते हुए बिसात बिछा चुके है। गलहलोत अभी तक सचिन पायलट की बगावत को भूल नहीं पाए है। यदि केंद्रीय नेतृत्व की जिम्मेदारी गहलोत को मिलती है, तो वह राजस्थान में वर्तमान में विधानसभा अध्यक्ष सी पी जोशी और गुजरात कांग्रेस प्रभारी रघु शर्मा को अपनी जगह प्रमोट करेंगे। दोनों ही नेताओं ने पायलट की बगावत के समय सीएम गहलोत का खुलकर साथ दिया था। रघु शर्मा ने पायलट कैंप का साथ छोड़कर गहलोत कैंप में एंट्री लेकर पायलट के गणित को बिगाड़ दिया था। आपको बता दें रघु शर्मा को अजमेर से सांसद सचिन पायलट की मदद से ही बने थे। हालांकि, बाद रघु शर्मा ने पाला बदल दिया। सीएम गहलोत के कहने पर ही रघु शर्मा को पीएम मोदी के गृह राज्य गुजरात का प्रभारी बनाया गया। सीपी जोशी कभी गहलोत के विरोधी हुआ करते थे, लेकिन अब गहलोत कैंप के माने जाते हैं। हाल ही सीएम गहलोत जोधपुर दौरे से लोटने के बाद जयपुर एयरपोर्ट से सीधे रघु शर्मा के घर गए और उनके स्वास्थ्य की जानकारी ली थी। यह दिखाता है कि दोनों नेताओं के बेहद मधुर संबंध है।

सीपी जोशी, रघु शर्मा डॉ कल्ला पर खेल सकते हैं दांव

सीएम गहलोत कांग्रेस अध्यक्ष बनते हैं उनके लिए राजस्थान विधानसभा चुनाव जीतना सबसे बड़ी चुनौती होगी। जातीय समीकरण के लिहाज से सीपी जोशी और रघु शर्मा बीडी कल्ला सीएम फेस के लिए सही माने जा रहे हैं। राजस्थान में ब्राह्मण कभी कांग्रेस को वोट हुआ करता था लेकिन बाद में कांग्रेस से छिटक गया। हरदेव जोशी और नवलकिशोर शर्मा कांग्रेस के बड़े ब्राह्मण चेहरा हुआ करते थे। गहलोत ब्राह्मण वोटर्स को लुभाने के लिए दोनों नेताओं में किसी एक पर दांव खेल सकते हैं। राजस्थान प्रदेश कांग्रेस कमेटी अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा जाट समुदाय से आते हैं। सीए गहलोत खुद ओबीसी वर्ग है। सीएम गहलोत ने एससी-एसटी वर्ग को खुश करने के लिए पहली बार कैबिनेट में पर्याप्त जगह दी है। गहलोत रणनीति के तहत पूर्व केंद्रीय मंत्री जसवंत सिंह के पुत्र मानवेंद्र सिंह को संगठन में बड़ी जिम्मेदार देकर राजपूतों को भी खुश कर सकते हैं। गहलोत के कांग्रेस अध्यक्ष बनते ही राजस्थान की राजनीति में उठापटक हो सकती है। राजस्थान में वही सीएम बनेगा जिस सीएम गहलोत चाहेंगे।