Thar पोस्ट, न्यूज। स्वर्ण सुर-संगम के 11वें वार्षिकोत्सव पर प्रेम पुष्प कुंज पर संगीतमय कार्यक्रम संगीत संध्या का आयोजन किया गया।
जिसमें स्वर्ण सुर संगम के अनेकों कलाकारों ने राग रागिनियों मैं व गायन वादन आदि में अपनी संगीत कलाएं प्रस्तुत की।स्वर्ण सुर-संगम के प्रेरणा स्रोत श्री ज्ञानेश्वर सोनी ने शास्त्रीय धुन पर आधारित …. तोसे नैना उलझ उलझ गए श्याम एवं सखी म्हारी नींद नसानी हो रचनाएं प्रस्तुत की।स्वर्ण सुर संगम के अध्यक्ष श्री चांद रतन सोनी ने मन रे कृष्ण नाम कह लीजे एवं जय शिव शंकर हे करुणाकर भजन रचनाएं सुनाई।
गौरी शंकर सोनी ने शास्त्री धुन पर आधारित यमन कल्याण विलंबित व द्रुत ख्याल गायन के अलावा अब वो मेरे प्राण कहां है एवं। गजल जिन रातों में नींद उड़ जाती है गाकर माहौल संगीतमय कर दिया।
श्री अनिल आसोपा ने सेक्सोफोन पर रूप तेरा मस्ताना एवं बांसुरी पर अजी रूठ कर अब कहां जाइएगा सुना कर सभी का मन मोह लिया।
श्री सुखीराम गजल मुझे जिंदगी की दुआ लगे एवं संस्कृत एवं हिंदी भाषा दोनों में….. बहारों फूल बरसाओ एवं ना कजरे की धार गाकर भाव विभोर कर दिया।
स्वर्ण सुर संगम के सचिव श्री मोहन लाल सोनी ने सुख के सब साथी गाकर वाहवाही लूटी।
श्री राजेंद्र स्वर्णकार ने गजल दोस्तों ये इल्तजा है प्यार कीजिए गाकर समां बांध दिया।
स्वर्ण सुर संगम के सचिव श्री प्रेम स्वर्णकार ने शोला हूं भड़कने की गुजारिश नहीं करता एवं तुमको देखा तो ये ख्याल आया… गजलें प्रस्तुत कर आनंदित किया।
सभी कलाकारों ने स्वयं हारमोनियम बजाते हुए अपनी अपनी प्रस्तुतियां दी बांसुरी पर संगत श्री अनिल आसोपा ने की एवं ढोलक एवं तबले पर संगत श्री ज्ञानेश्वर सोनी के अतिरिक्त श्री मोहन लाल सोनी, श्री गौरी शंकर सोनी, श्री अनिल आसोपा एवं श्री सुखीराम ने संगत की,
उक्त अवसर पर श्री ज्ञानेश्वर सोनी चांद रतन सोनी, मोहन लाल सोनी गौरी शंकर सोनी अनिल आसोपा सुखीराम राजेंद्र स्वर्णकार प्रेम स्वर्णकार सूरज रतन सोनी जयचंद लाल सोनी राहुल सोनी के अतिरिक्त अन्य गणमान्य लोग भी उपस्थित थे।