Thar पोस्ट। मुरलीधर व्यास नगर में समस्याओं का निराकरण नहीं हो रहा। वार्ड संख्या 2 की पार्षद सुधा आचार्य के अनुसार पश्चिम बीकानेर की सबसे बड़ी कॉलोनी है जो कि “नगर विकास न्यास” के अधीनस्थ है। वार्ड संख्या दो की यह कॉलोनी जो कि मुरलीधर व्यास नगर के नाम से जानी जाती है, के हालात बेहद खराब है।टूटी हुई सड़कें, अनेक स्थानों पर सीवरेज प्रणाली चालू ना होना,पार्कों की दयनीय स्थिति ,ये ऐसी समस्याएं हैं जो मनुष्य की दैनिक आवश्यकताओं से जुड़ी हुई है । मुरलीधर व्यास नगर के निवासी अपनी मूलभूत सुविधाओं के लिए भी इन समस्याओं से जूझते रहते है। प्रशासन को बार-बार इन समस्याओं से अवगत करवाया गया है लेकिन नगर विकास न्यास के अधिकारी सदैव ,”बजट की कमी” कह कर के टाल देते हैं जबकि मुरलीधर व्यास नगर से प्रतिमाह लाखों रुपए का रेवेन्यू नगर विकास न्यास प्राप्त कर रहा है और स्वयं जिलाधीश महोदय के यह आदेश हैं कि जिस कॉलोनी से जितना रेवेन्यू लिया जाता है उसका 50% उसी कॉलोनी में लगाया जाना आवश्यक है मुरलीधर के निवासी यह जानना चाहते हैं कि गत 10 वर्षों में कितना रेवेन्यू नगर विकास न्यास ने मुरलीधर व्यास कॉलोनी से लिया और उसका कितना प्रतिशत यहां के विकास में लगाया।मुरलीधर व्यास नगर में अनेक पार्क भी हैं वे भी इस अव्यवस्था से अछूते नहीं है पार्कों की स्थिति तो और भी दयनीय है टूटी हुई दीवारें भ्रमण पथ का कहीं अता पता नहीं और ना वहां पर प्रकाश व्यवस्था है,ना ही स्वास्थ्योपयोगी उपकरण लगे हुए हैं ना ही वहां पर हरी घास दिखाई देती है ।क्या नगर विकास न्यास का यह दायित्व नहीं है कि जहां से प्रतिवर्ष लाखों रुपए का रेवेन्यू प्राप्त कर रही है वहां के निवासियों की मूलभूत आवश्यकता को दृष्टिगत रखते हुए सुविधाएं उपलब्ध करवाएं।मुरलीधर व्यास नगर के निवासी अपने आप को ठगा सा महसूस कर रहे हैं क्योंकि गंदगी मल मूत्र नालियों में ही बहता रहता है,कारण स्पष्ट है कि सीवरेज प्रणाली समुचित रूप से चालू नहीं है अधिकांश घरों के कनेक्शन मुख्य सीवरेज प्रणाली से किए ही नहीं गए हैं और यह भी स्पष्ट नहीं है कि सीवरेज संबंधी कनेक्शन उपभोक्ता को स्वयं करवाने हैं अथवा प्रशासन करवा कर देगा। आए दिन सीवरेज प्रणाली से संबंधित गटर जो है भर जाते हैं सड़कपर गंदगी पसीना आम बात है। और मुरलीधर व्यास नगर में जो नाले बने हुए हैं उनके दीवारें जगह जगह टूटी हुई है जीर्ण शीर्ण अवस्था में हैं और वे नाले जगह-जगह इतने क्षति ग्रस्त हो गए हैं कि गंदा पानी उनमें इकट्ठा होकर के सड़क के बाहर तक आ जाता है सड़के उनका तो और भी बुरा हाल है जगह-जगह टूटी फूटी सड़कें है जिन पर आम आदमी का चलना फिरना भी दुश्वार है,