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IMG 20230924 WA0220 'साहित्य एक पवित्र मंदिर है' Bikaner Local News Portal साहित्य
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Thar पोस्ट श्रीगंगानगर। प्रख्यात नाटककार एवं साहित्य अकादेमी राजस्थानी परामर्श मंडल के संयोजक डॉ. अर्जुनदेव चारण ने कहा है कि आज सोशल मीडिया का जमाना है और हमें उसका सदुपयोग करने के लिए अच्छी किताबें पढक़र उनके बारे में उस पर लिखना चाहिए।
वे रविवार शाम को साहित्य अकादेमी एवं सृजन सेवा संस्थान के संयुक्त तत्वावधान में चौधरी बल्लूराम गोदारा राजकीय कन्या महाविद्यालय के सभागार में आयोजित दो दिवसीय समकालीन राजस्थानी साहित्य विषयक संगोष्ठी के समापन समारोह में बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि यह इसलिए जरूरी है कि नए लोगों तक पुस्तक के बारे में जानकारी पहुंच सके। इससे पाठक विस्तार होगा। पाठक और लेखक के बीच रिश्ता बना रहेगा।
डॉ. चारण ने कहा कि इस दो दिन के सम्मेलन में तीन पीढिय़ां एक साथ रहीं। ऐसा इसलिए किया गया, क्योंकि तीन दृष्टि से बात हो सके। सभी की सहमति से निर्णय हो सकें। उन्होंने कहा कि राजस्थानी में सबसे बड़ी समस्या पत्रिकाओं का अभाव है। अगर नियमित पत्रिकाएं प्रकाशित हों तो राजस्थानी बहुत आगे जा सकती है।
मुख्य अतिथि राजस्थानी परामर्श मंडल के पूर्व संयोजक एवं वरिष्ठ साहित्यकार मधु आचार्य ‘आशावादी’ ने कहा कि साहित्य एक पवित्र मंदिर है। मंदिर में जाने से पहले तो जूते भी बाहर उतारने होते हैं। इसलिए साहित्य में कभी पक्षपात नहीं किया जाना चाहिए। जो भी महत्वपूर्ण काम कर रहा है, नया या पुराना, उसका नाम सामने आना चाहिए। उन्होंने कहा कि राजस्थानी लेखकों को अच्छा पाठक भी बनना चाहिए। अगर विद्वान व्यक्ति ही साहित्य की प्रशंसा नहीं करता तो फिर साहित्य खत्म होना शुरू हो जाता है। ठीक वैसे ही जैसे मूर्ख व्यक्ति की तारीफ से साहित्य मर जाता है।
चौधरी बल्लूराम गोदारा राजकीय कन्या महाविद्यालय की प्राचार्य डॉ. आशा शर्मा ने सभी साहित्यकारों का आभार व्यक्त किया और राजस्थानी की नियमित गतिविधियां करने रहने का आग्रह किया। सत्र का संचालन अरुण उर्मेश ने किया।
इससे पहले सुबह समकालीन राजस्थानी नाटक, निबंध और आलोचना विषय पर पत्रवाचन हुआ। नाटक पर डॉ. आशाराम भार्गव ने, निबंध पर कृष्णकुमार आशु ने और आलोचना पर हरीश बी शर्मा ने पत्रवाचन किया। इस सत्र की अध्यक्षता साहित्यकार डॉ. पीसी आचार्य ने की। संचालन मीनाक्षी आहुजा ने किया। इसके बाद समकालीन राजस्थानी युवा लेखन, महिला लेखन एवं बाल साहित्य पर सत्र हुआ। इसमें राजेंद्रदान देथा ने युवा लेखन पर, डॉ. नवज्योत भनोत ने महिला लेखन पर एवं किरण बादल ने बाल साहित्य पर पत्रवाचन किया। इस सत्र का संचालन सत्यपाल जोइया ने किया।
कार्यक्रम में प्रदेश भर से पच्चीस से ज्यादा साहित्यारों ने शिरकत की। बड़ी संख्या में स्थानीय साहित्यकार एवं साहित्य प्रेमी भी मौजूद थे।


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