Thar पोस्ट, न्यूज। शिक्षा मंत्री डॉ. बी. डी. कल्ला ने कहा कि सैन समाज, कर्म प्रधान और श्रमशील समाज है। यह समाज सदैव परोपकार के कार्यों से जुड़ा रहता है।
शिक्षा मंत्री ने रविवार को शीतला गेट के बाहर स्थित वैद्य नाई मसालची सामसुता सेन भवन के सामुदायिक भवन निर्माण के लोकार्पण और संकल्प सेवा संस्थान द्वारा आयोजित मातृशक्ति सम्मान समारोह के दौरान यह बात कही।
इस सामुदायिक भवन के निर्माण पर विधायक निधि से दस लाख रुपए व्यय हुए हैं। इस दौरान शिक्षा मंत्री ने यहां विधायक निधि से अतिरिक्त पांच लाख रुपए स्वीकृत करने की घोषणा की।
यहां आयोजित सभा को संबोधित करते हुए शिक्षा मंत्री ने कहा कि सैन समाज के लोग स्वावलंबी होते हैं। इनका निःस्वार्थ सेवा भाव सभी समाजों के लिए अनुकरणीय है।
शिक्षा मंत्री ने कहा कि आज का दौर शिक्षा का है। प्रत्येक व्यक्ति को चाहिए कि वह अपने बच्चों को खूब पढ़ाए। सेन समाज ट्रस्ट भी इस दिशा में प्राथमिकता से कार्य करे। शिक्षा मंत्री ने कहा कि बीकानेर में स्तरीय शिक्षा सुविधाओं का विकास उनकी सर्वोच्च प्राथमिकता रही है। आज शहर में पांच विश्वविद्यालय कार्य कर रहे हैं। वहीं शिक्षा और अनुसंधान से संबंधित राष्ट्र स्तरीय संस्थान यहां कार्य कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि साढ़े 4 वर्षों में क्षेत्र में शिक्षा के साथ चिकित्सा सुविधा विस्तार में भी उल्लेखनीय कार्य हुए हैं। शिक्षा मंत्री ने बताया कि उन्होंने विधायक कोष से 108 से अधिक समाजों के सामुदायिक भवन से बनवाए हैं। यह अपने आप में कीर्तिमान है।
इससे पहले शिक्षा मंत्री ने सामुदायिक भवन का उद्घाटन किया। उन्होंने विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय कार्य करने वाली महिलाओं और भामाशाहों को पुरस्कार प्रदान किए।
कार्यक्रम में ट्रस्ट के अध्यक्ष राम नारायण सैन, पूर्व अध्यक्ष हरि प्रकाश सैन, सुशील सैन, आनंद सैन, ओम प्रकाश सैन, किशन पडिहार, शकुंतला पडिहार, पाना देवी, सार्वजनिक निर्माण विभाग के अधीक्षण अभियंता मुकेश गुप्ता, सीएमएचओ डॉ. मोहम्मद अबरार पवार, कन्हैयालाल कल्ला, राम अवतार सैनी, विकास सैन, हेमंत सैन, अरुण राठौड़ सहित अनेक लोग मौजूद रहे। कार्यक्रम का संचालन हर्ष ने किया।
Thar। शिक्षा एवं कला साहित्य और संस्कृति मंत्री डॉ बी डी कल्ला ने रविवार को राजस्थान उर्दू अकादमी सदस्य ख्यातनाम शाइर असद अली असद के दूसरे ग़ज़ल संग्रह ” ….तो ग़ज़ल होती है” का विमोचन किया।इस अवसर पर उन्होंने कहा कि असद अली असद एक उम्दा शाइर हैं।वे लंबे से साहित्य साधना कर रहे हैं।उनकी शायरी ही उनकी पहचान है।
डॉ कल्ला ने कहा कि असद अली असद ने अखिल भारतीय मुशायरों में बीकानेर ही नहीं बल्कि राजस्थान का भी अनेक बार प्रतिनिधित्व किया है।
मुख्य अतिथि पूर्व महापौर एवं पूर्व अध्यक्ष नगर विकास न्यास हाजी मक़सूद अहमद ने कहा कि असद अली असद ने बीकानेर की उर्दू शायरी को निरंतर आगे बढ़ाया है।वे एक समर्पित शाइर हैं।
विशिष्ठ अतिथि वरिष्ठ शाइर ज़ाकिर अदीब ने राजस्थान साहित्य अकादमी, उदयपुर के आर्थिक सहयोग से प्रकाशित असद की विमोचित कृति पर रोशनी डालते हुए उन्हें ग़ज़ल का शाइर बताया।
कार्यक्रम संयोजक डॉ ज़िया उल हसन क़ादरी ने असद के रचना सँसार का परिचय देते हुए कहा कि असद ना सिर्फ अच्छे शाइर हैं बल्कि बेहतरीन ड्रामानिगर, अनुवादक और संयोजक भी हैं।वे उर्दू के अलावा हिंदी और राजस्थानी में भी अधिकारपूर्वक लेखन करते हैं।इससे पूर्व उनकी अनेक पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं जिनमें “मुकम्मल हुई तलाश” और “नुवों परभात” “केसर की महक”,…मगर देख रहा हूं” और “इबादत”प्रमुख पुस्तकें हैं।
