Thar पोस्ट न्यूज। बीकानेर में इन दोनों गणेश महोत्सव परवान पर है। जगह-जगह भगवान गणपति की प्रतिमाएं स्थापित कर पूजन अर्चन किया जा रहा है और भगवान गणेश को विभिन्न प्रकार की भोग लगे जा रहे हैं। रविवार को शहर में स्थापित गणेश प्रतिमाओं के समक्ष छप्पन भोग का प्रसाद लगाया गया। सदाफते, रतानी व्यासों के चौक, जोशीवाड़ा जसोलाई तलाई सहित अनेक स्थानों पर स्थापित गणेश प्रतिभाओं के समक्ष 56 भोग का प्रसाद चढ़ाया गया। घरों में भी भगवान गणपति को छप्पन भोग अर्पित किया गया। पंडित नारायण व्यास ने बताया कि 10 दिनों तक चलने वाले गणेश महोत्सव के तहत रतानी व्यासों की चौकी के पास स्थापित गणेश प्रतिमा के छप्पन भोग चढ़ाया गया।

पंडित गिरधर लाल जी किराडू के साले की होली स्थित घर में सालों से मनाया जा रहा है गणेशोत्सव। इंद्र नारायण जी किराडू ने बताया की गणेश की यह प्रतिमा लगभग 175 साल पुरानी है । पूर्वज बताते थे की इक्कीसिया गणेश जी की मूर्ति से पहले ये मूर्ति बनाई गई थी फिर कुछ परिवर्तन कर के इक्कीसियां गणेश जी की मूर्ति बनाई गई ।इस मूर्ति के साथ गणेश स्रोत की एक हस्त लिखित पुस्तक भी है वो भी लगभग इतनी ही पुरानी है जो शायद पंडित कस्तूर चंद जी किराडू या गणपत जी किराडू द्वारा लिखी हुई,” अथ गणपति सहस्रनाम” है जो बड़ी जीर्ण सीर्ण अवस्था में है। आज भगवान गणेश का कृत्रिम लाइट से शृंगार किया गया। नगेंद्र किराडू ने बताया की इसकी दस दिन तक पूजा अर्चना की जाती है और फिर अनंत चतुर्दशी के दिन पुनः मंदिर में स्थापित कर दी जाती है। गायत्री देवी किराडू ने बताया की इस मूर्ति का पंचामृत से स्नान करा कर फिर दस दिन तक पूजा अर्चना की जाती है। इस कार्य में घर के लगभग सभी सदस्य तन मन धन से समर्पित होकर गजानंद भगवान का उत्सव मनाते हैं। डॉ. ज्योति बाला, प्रीतीबाला, कोमल सीमा, प्रिया का विशेष सहयोग रहता है।

समाज में दैवी संपदा के बढ़ने से राष्ट्र की दशा दिशा में आएगा सकारात्मक परिवर्तन – स्वामी विमर्शानंद गिरि
श्री लालेश्वर महादेव मंदिर शिवमठ शिवबाड़ी बीकानेर में चल रहे सप्त दिवसीय श्रीमद् भगवद गीता सत्संग का दूसरे दिवस पर व्यास पीठ से परम पूज्य स्वामी विमर्शानंद गिरि जी ने गीता के 16 अध्याय में दैवी संपत्ति पर प्रकाश डालते हुए लोगों को दैवी संपत्ति के गुणो को ग्रहण एवं आसुरी संपत्ति को त्याग करने हेतु विभिन्न उपाय सुझाए ।

स्वामी जी ने कहा कि भगवान श्री कृष्ण ने प्रथम दैवी संपत्ति अभय को माना है अर्थात ना मैं किसी से निर्मुल भय करू एवं ना किसी को मेरे द्वारा भय प्रदान हो । अभय का गुण प्राप्त होने से ही आत्मा से परमात्मा को प्राप्त किया जा सकता है । नवधा भक्ति , आध्यात्मिक चिंतन सत्संग आदि से दैवी संपत्ति के क्षरण को रोका जा सकता है । आज राष्ट्र के नागरिकों को चाहिए कि वह दैवी संपत्ति गुणों को ग्रहण कर राष्ट्र निर्माण के कार्य में जुटे । आज हमें यह विश्वास है युवा वर्ग द्वारा दैवी संपदा को अपनाने से निश्चित ही भारत दैवी संपदा से जगतगुरु बनेगा। कथा सत्संग के दौरान अमरनाथ में विराजित महादेव की प्रतिकृति रामदयाल राजपुरोहित द्वारा व्यास पीठ पर बनाई गई । कार्यक्रम में बड़ी संख्या में बीकानेर शहर के गणमान्यों एवं मानव प्रबोधन प्रन्यास के सदस्यों की मौजूदगी रही ।