Thar पोस्ट। राजधानी जयपुर में 17 रोगियों की आंखों में खतरनाक संक्रमण की पुष्टि होने के बाद 3 ओटी बद कर दिए गए हैं। एसएमएस हॉस्पिटल में खतरनाक स्यूडोमोनास संक्रमण की स्थिति मिली है। अस्पताल प्रशासन ने नेत्र रोग विभाग के तीनों ऑपरेशन थिएटर बंद कर दिए हैं। इमरजेंसी ऑपरेशन थियेटर में भी शुक्रवार को सर्जरी नहीं हुई। देर रात को इमरजेंसी ओ.टी. को शुरू किया गया। अन्य 3 ऑपरेशन थिएटर फिलहाल बंद रहेंगे।
मिली जानकारी के मुताबिक अस्पताल के चरक भवन के ऑपरेशन थिएटर में सोमवार से बुधवार तक 71 मरीजों के मोतियाबिंद के ऑपरेशन में हुए थे। इनमें से एक मरीज बुधवार को ओपीडी में आंख में सूजन, आंख लाल होने की शिकायत लेकर पहुंचा, तो उसे खतरनाक स्यूडोमोनास संक्रमण का संदिग्ध रोगी मानकर भर्ती किया गया। इसके बाद गुरुवार को भी 4-5 मरीजों में ऐसे ही लक्षण पाए गए। लेकिन अस्पताल के नेत्र रोग चिकित्सकों और अस्पताल प्रशासन ने इस जानकारी को छिपाकर रखा। बुधवार से शुक्रवार तक और मरीज शिकायत लेकर आते रहे। जिनकी संख्या 17 तक पहुंच गई। इस लापरवाहीपूर्ण रवैये के कारण मोतियाबिंद या आंखों के अन्य ऑपरेशन करने वाले मरीज समय पर सतर्क नहीं हो सके और तुरंत जांच-उपचार और बीमारी के निरोधात्मक उपाय नहीं कर पाए। इसलिए मरीजों में संक्रमण स्तर और मरीजों की संख्या बढ़ती गई।
एसएमएस हॉस्पिटल के अधीक्षक डॉक्टर अचल शर्मा ने बताया कि जिन मरीजों में स्यूडोमोनास संक्रमण के लक्षण पाए गए हैं। उन्हें भर्ती किया गया है । जांच और इलाज के लिए अलग-अलग कमेटी बनाई गई हैं। अन्य भर्ती मरीजों को घबराने की जरूरत नहीं है। चिकित्सकों ने बताया कि ऐसा संक्रमण एसएमएस हॉस्पिटल में कई वर्षों बाद देखा गया है। संक्रमण कैसे फैला ? इसकी जांच के लिए अलग-अलग कमेटी बनाई गई हैं। आज उसकी रिपोर्ट आने की संभावना है। आशंका है संक्रमण किसी मोतियाबिंद के मरीज के ऑपरेशन के दौरान ही फैला है।
ये लक्षण मिले : रोगियो में आंखों में धुंधलापन, आंख लाल होना, कम दिखाई देना, आंखों में सूजन आना, आंखों से चिपचिपा पदार्थ निकलना, जलन होना जैसे लक्षण दिखाई दे रहे हैं। हालांकि अभी यह पता लगाना मुश्किल है कि मरीजों की आंख की रोशनी चली गई है या सुरक्षित है। जिन मरीजों के मोतियाबिंद के ऑपरेशन हुए थे, उनकी आंखों पर पट्टी बंधी हुई है।
खतनाक है संक्रमण : स्यूडोमोनास एरुजिनोसा बैक्टीरिया का संक्रमण मरीजों की आंख में हुआ है, वह बेहद ही खतरनाक होता है। वह 24 घंटे में ही मरीज की आंख को खराब कर सकता है। यह एक बैक्टीरियल इंफेक्शन होता है। जो शरीर के भीतर संक्रमण फैलाता है। यदि यह ब्लड में मिल जाए। तो स्यूडोमोनास और भी घातक हो जाता है। इससे प्रतिरक्षा प्रणाली (एंटीबॉडीज सिस्टम) कमजोर हो सकता है। ऐसे में कोई व्यक्ति अस्पताल में है या उसकी प्रतिरक्षा प्रणाली कमजोर है, तो खतरा और भी गंभीर हो जाता है।स्यूडोमोनास एरुगिनोसा जिस जीवाणु के कारण होता है, वह एक कठिन प्रकृति का बैक्टीरिया है और कठोर वातावरण में भी जीवित रहने में सक्षम है। इससे पूरी तरह छुटकारा पाना मुश्किल हो जाता है। यह शायद ही कभी अस्पताल या स्वास्थ्य देखभाल सेटिंग के बाहर बीमारी का कारण बनता है। इसलिए पूरी संभावना अस्पतालों में ही इसके फैलने की रहती है। यह एक मरीज से दूसरे में भी आसानी से फैल सकता है।