जयपुर। राजस्थान के सीएम अशोक गहलोत ने राज्य में ब्लैक फंगस को महामारी घोषित कर दिया गया है। गहलोत सरकार ने इसका एलान करते हुए कहा कि ब्लैक फंगस अब खतरनाक रूप लेता जा रहा है और यह कई राज्यों में तेजी से फैल रहा है, इसलिए इसपर अधिक ध्यान देने की आवश्यकता है। म्यूकोरमाइकोसिस या ब्लैक फंगस एक गंभीर और दुर्लभ फंगल इंफेक्शन है, जिसकी वजह से संक्रमित मरीजों की आंखें निकालनी पड़ती हैं और गर्दन की हड्डी को भी निकालना पड़ता है. इससे मरीजों की मौत हो जाती है।बायोलॉजिकल भाषा में समझें तो ब्लैक फंगस, मोल्ड्स या फंगी के एक समूह की वजह से होता है ये मोल्ड्स पूरे पर्यावरण में जीवित रहते हैं ये साइनस या फेफड़ों को प्रभावित करता है. इस समय में कोरोना वायरस के साथ इसके भी रोगी मिलने शुरू हो गए हैं जो चिंता का सबब बनते जा रहे हैं।केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्धन सिंह ने ट्वीट कर बताया है कि आंखों में लालपन या दर्द, बुखार, खांसी, सिरदर्द, सांस में तकलीफ, साफ-साफ दिखाई नहीं देना, उल्टी में खून आना या मानसिक स्थिति में बदलाव ब्लैक फंगस के लक्षण हो सकते हैं.
दिल्ली के अस्पतालों में ब्लैक फंगस की दस्तक
कोरोना से ठीक होने वाले या संक्रमण के दौरान मरीज ब्लैक फंगस की चपेट में आ रहे हैं. इसके चलते मरीजों की मौत तक हो रही है. आज ही दिल्ली में भी म्यूकोर्माइकोसिस (ब्लैक फंगस) के मामले सामने आए हैं, एम्स में ब्लैक फंगस के 75-80 मामले, मैक्स अस्पताल में 50 मामले, इंद्रप्रस्थ अपोलो अस्पताल में 10 मामले सामने आए हैं, वहीं एक मरीज की मौत भी हो गई है।
एम्स दिल्ली के निदेशक डॉ. रणदीप गुलेरिया ने कहा, कोरोना वायरस से पीड़ित मरीज पर आमतौर पर पांच से 10 दिन तक ही स्टेरॉयड की जरूरत पड़ती है, इससे ज्यादा दिनों तक मरीज को यह दवाएं दी जाएं तो ब्लैक फंगस की आशंका काफी बढ़ जाती है. स्टेरॉयड दे रहे हैं तो मरीज की पूरी निगरानी करना भी स्वास्थ्य कर्मचारियों की जिम्मेदारी है. ब्लैक फंगस से बचने के लिए मरीज की निगरानी बहुत जरूरी है।