Thar पोस्ट, न्यूज। देश मे पिछले महीने की 21 अक्टूबर तक जनता के बीच मौजूद नकदी 30.88 लाख करोड़ रुपये के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई जो यह दिखाता है कि नोटबंदी के छह साल बाद भी देश में नकदी का भरपूर उपयोग जारी है. यह आंकड़ा चार नवंबर, 2016 को खत्म पखवाड़े में चलन में मौजूद मुद्रा के स्तर से 71.84 फीसदी ज्यादा है. यह आंकड़ा चार नवंबर, 2016 को खत्म हुए पखवाड़े में 17.7 लाख करोड़ रुपये था. यानी नोटबंदी का ऐलान होने से पहले नकदी का जितना सर्क्युलेशन था, उसमें अब 72 फीसदी से भी ज्यादा की बढ़ोतरी हो चुकी है. रिजर्व बैंक के इन आंकड़ों का विश्लेषण करेंगे तो पता चलता है कि सिस्‍टम से बाहर हुई 99 फीसदी नकदी वापस लौट चुकी है.इसका मतलब साफ है कि काला धन जैसे पहले मार्किट में घूम रहा था वो आज और भी ज्यादा छाती चौड़ी करके अपने मकसद को अंजाम दे रहा है. मनीकंट्रोल की एक रिपोर्ट के अनुसार, जिस समय सिस्‍टम से 500 और 1,000 रुपये के पुराने नोट को बाहर किया गया था, उस समय इनकी कुल भागीदारी 86 फीसदी थी. इससे पता चलता है कि सिस्‍टम में मौजूद इतनी भारी मात्रा में किसी नोट को बंद करने से कितना बड़ा असर पड़ सकता है. नोटबंदी के इतने साल बाद अर्थशास्त्रियों को लगता है कि यह फैसला काफी सख्‍त था और इससे महज 5 फीसदी से भी कम ब्‍लैक मनी पर ही शिकंजा कसा जा सका है. बाकी का कालाधान सोने-चांदी की खरीद और रियल एस्‍टेट में मोटे निवेश के रूप में आज भी भरा पड़ा है जिसे पकड़ने के लिए हमारी सरकार आज भी सिर्फ रास्ते ही तलाश रही है.पीएम मोदी का देश के नाम वह संबोधन अगर आप भूल गये हों तो याद दिला दें कि उन्होंने इस नोटबंदी का दूसरा बड़ा मकसद नकली नोटों पर लगाम कसना भी बताया था. लेकिन हकीकत रिजर्व बैंक की एक रिपोर्ट से पता चलती है जिसे जानकर आप भी हैरान हो जाएंगे. बीती 27 मई को जारी इस रिपोर्ट में आरबीआई ने बताया है कि नकली नोटों की संख्‍या 10.7 फीसदी बढ़ गई है. इसमें 500 रुपये के नकली नोट में 101.93 फीसदी का उछाल आया है तो 2,000 के नकली नोट की संख्‍या 54 फीसदी बढ़ने की बात कही गई है. इतना ही नहीं 10 रुपये के नकली नोट की संख्‍या 16.45 फीसदी और 20 रुपये के नकली नोट की संख्‍या 16.48 फीसदी बढ़ी है.इसके अलावा 200 रुपये के नोट का भी नकली वर्जन 11.7 फीसदी बढ़ गया है. 50 रुपये के नकली नोट सिस्‍टम में 28.65 फीसदी बढ़े तो 100 रुपये के नकली नोट 16.71 फीसदी बढ़ गए हैं. कुल नकली नोट में 6.9 फीसदी आरबीआई में पकड़े गए जबकि 93.1 फीसदी की पहचान अन्‍य बैंकों में हुई. सुप्रीम कोर्ट तो अगली सुनवाई पर तय करेगा कि सरकार की खामियां क्या थी लेकिन देश के रिज़र्व बैंक की रिपोर्ट के आधार पर आप ही तय कीजिये कि क्या नोटबंदी का फैसला अपना मक़सद पूरा करने में कामयाब हुआ?