Thar पोस्ट। बीकानेर में लोगों की साँसे उखड रही है लेकिन कुछ लोगों का दिल भी नहीं पसीजता। जाने किस मिटटी के बने है। कालाबाज़ारी में डूबे हुए है? कोरोना के दौर में यहां बीकानेर में बीते एक माह के अंतराल में करीब ढाई तीन करोड़ रूपये के रेमडेसिविर इंजेक्शन  की कालाबाजारी हुई है। यहां बड़े पैमाने पर हुई इस कालाबाजारी में फिलहाल मित्तल फार्मा,मित्तल ड्रग ऐजेसी,तंवर मेडिकोज,गौरव ऐजेंसी और राजेन्द्र मेडिकलएण्ड जनरल स्टोर का नाम सामने आया है। जांच पड़ताल के लिये बीते सप्ताह बीकानेर आई एसओजी टीम इन फर्मो के रेमडेसिविर इंजेक्शन की खरीद फरोख्त और सप्लाई से जुड़े दस्तावेजभी कब्जे में लिये है। इंजेक्शन की कालाबाजारी के खेल में निजी हॉस्पिटल्स के अलावा औषधी विभाग के सहायक औषधी नियंत्रक की मिलीभगत भी सामने आई है। दवा कारोबार जगत से जुड़े सूत्रों ने बताया है कि सबसे ज्यादा कालाबाजारी मित्तल फार्मा और मित्तल ड्रग ऐजेसी की सामने आई है । जानकारी के अनुसार इन दोनों फर्मो के संचालकों ने करीब 1011 रेमडेसिविर इंजेक्शन ब्लैकमें बेचे है । मजे कि बात तो यह है कि मित्तल फार्मा और मित्तल ड्रग ऐजेंसी ने अपनी बिलिंग में शहर के डॉ.अशोक सुथार,डॉ.केकेपुरोहित,डॉ.विजय शांति बांठिया,डॉ.अजय गुप्ता,डॉ.श्रेयासं जैन,डॉ.अच्यूतत्रिवेदी के अलावा कोलकाता,जयपुर और श्रीगंगानगर के कई प्राइवेट होस्पीटल में रेमडेसिविर इंजेक्शनों की सप्लाई देना बताया है,जबकि इनमें अधिकांश बिल ही फर्जी बताये जाते है। इस तरह तंवर मेडिकोज और गौरव ऐजेंसी के बिलों में भी रेमडेसिविर इजेंक्शनों की कालाबाजारी के तथ्य सामने आये है। यह भी पता चला है कि इन फर्मो ने फर्जी बिलों के जरिये बीकानेर की प्रावइेट होस्पीटलों में बड़े पैमानेपर रेमडेसिविर इंजेक्शन सप्लाई किये। तीस-तीस हजार में बेचा एक इंजेक्शनबीकानेर में बड़े पैमाने पर हुई रेमडेसिविर इजेंशन की कालाबाजारी सेजुड़े मामले की पड़ताल में सामने आया है कि दवा कारोबारियों ने मौकेका फायदा उठाने के लिये पहले तो इंजेक्शन की सप्लाई ठप्प कर दी,फिरडिमांड बढने पर एक इंजेक्शन तीस हजार रूपये की कीमत में बेचा। इसकेपुख्ता तथ्य भी सामने आये है कि बीकानेर में करीब ढाई तीन हजार रेमडेसिविर इंजेशनों की कालाबाजारी हुई है। जानकारी के अनुसार इससमय अलग अलग कंपनियां रेमडेसिविर इंजेक्शन का उत्पादन कर रही हैं. इसकी एक डोज की कीमत 899 रुपये से लेकर 5400 रुपये तकहै,लेकिन डिमांड बढने और कोरोना की मारामारी का दौर शुरू होने के बाद दवा कारोबारियों ने इस इंजेक्शन की एक डोज तीस से चालीस हजार रूपये में बेची। नकली इंजेक्शन कर दिये सप्लाई हैरानी की बात तो यह है कि रेमडेसिविर इजेंक्शनों की कालाबाजारी मेंलिप्त मेडिकल फर्मो के संचालकों ने मारामारी के दौर में नकली औरएक्सपायर डेट इंजेक्शन भी खूब सप्लाई किये। इसका खुलासा करने के लिये एसओजी ने इंजेक्शन निर्माता कंपनी से बैच नंबरों का ब्यौरा भीमांगा है,और इंजेक्शन सप्लायर मेडिकल फर्मा के दस्तावेजों से मिलान कर रही है। मामला मानव जीवन के स्वास्थ्य से जुड़ा होने के कारण एसओजीइसकी गहनता से जांच कर कड़ी से कड़ी जोड़कर कालाबाजारी में लिप्तदवा कारोबारियों के खिलाफ पुख्ता साक्ष्य सबूत जुटा रही है । एंटी वायरल इंजेक्शन है रेमडेसिविर डॉक्टरों के मुताबिक रेमडेसिविर एंटी वायरल इंजेक्शन है,एंटी वायरलका मतलब है कि ये दवाई शरीर में संक्रमित कोशिशकाओं को ठीक करनेसाथ वायरल संक्रमण को रोकने में कारगर है,मतलब यह कि जब वायरसशरीर में फेफड़ों की कोशिकाओं को नुकसान पहुंचाता है तो वायरस से लडऩे के लिए और नुकसान को रोकने के लिए ये दवाई दी जाती है। भारत सरकार ने पिछले साल ही कोरोना मरीजों पर इस दवा के इस्तेमाल कीमंजूरी दी थी। इस बार कोरोना के जानलेवा पलटवार में इस इंजेक्शन कीडिमांड बढने से इसकी कालाबाजारी शुरू हो गई। साफ़ है कि सरकार कोरोना से जूझ रहे रोगियों पर करोड़ो रूपए खर्च कर रही है और कुछ लोग पैसों के लिए यह धन्धा कर रहे है।साभार।