





Thar पोस्ट न्यूज। राजस्थान में निजी बस ऑपरेटर्स की हड़ताल ने कमर तोड़ दी है। प्राइवेट बस ऑपरेटर्स और परिवहन विभाग के बीच मंगलवार को दूसरे दौर की वार्ता भी बेनतीजा रही, जिससे हड़ताल को लेकर गतिरोध और गहरा गया है। परिवहन आयुक्त के साथ हुई बैठक में सहमति नहीं बन पाई।





ऑपरेटर्स ने अब यह शर्त रखी है कि पहले आरटीओ द्वितीय धर्मेंद्र चौधरी और इंस्पेक्टर राजेश चौधरी को एपीओ किया जाए, तभी तीसरे दौर की वार्ता सामान्य दिनों में प्रदेश में करीब 35 हजार बसों का संचालन होता है लेकिन हड़ताल के बाद केवल रोडवेज की लगभग 3300 बसें ही चल रही हैं। इससे रोजाना लाखों यात्रियों की आवाजाही प्रभावित हुई है। खाटूश्यामजी मंदिर जाने वाले श्रद्धालुओं को परेशानी झेलनी पड़ी क्योंकि कई रूटों पर बस सेवाएं बंद हैं। यात्रियों को घंटों इंतजार करना पड़ रहा है और दूर-दराज के यात्री सिंधी कैंप बस स्टैंड पहुंचकर भी बसों के लिए भटक रहे हैं।
दूसरी ओर राजस्थान बस ऑपरेटर्स एसोसिएशन और आरटीओ इंस्पेक्टर के बीच टकराव भी सामने आया। सिंधी कैंप बस स्टैंड पर ऑपरेटर्स ने बसों में बैठे यात्रियों को उतारकर विरोध जताया और नारेबाजी की। राजेंद्र शर्मा और महासचिव प्रवीण अग्रवाल समेत अन्य ऑपरेटर्स ने कार्रवाई का विरोध किया, जिसके बाद पुलिस को हस्तक्षेप करना पड़ा।
राजस्थान में इस हड़ताल से प्रदेश में कई समारोह रद्द करने पड़े हैं और परिवहन व्यवस्था पर दबाव लगातार बना हुआ है। सरकार और ऑपरेटर्स के बीच वार्ता का अगला दौर होने की संभावना है, लेकिन फिलहाल समाधान नहीं निकल पाया है। इससे पहले ऑपरेटर्स ने यात्रियों को बीच रास्ते उतारकर बसें सीज नहीं करने, एआईपीपी परमिट टैक्स को मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश की तर्ज पर स्लैब में कमी करने, मोटर व्हीकल एक्ट की धारा 153 के तहत कार्रवाई बंद करने और भारी-भरकम चालानों पर रोक लगाने की मांग की थी। हड़ताल के कारण प्रदेश में पब्लिक ट्रांसपोर्ट व्यवस्था पूरी तरह प्रभावित हुई है। बस स्टैंड पर भारी भीड़ के चलते कई यात्रियों को बसों की छतों पर सफर करना पड़ा, जबकि कुछ यात्रियों को घंटों इंतजार के बाद बसें मिलीं।