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IMG 20250415 WA0015 scaled ऊँटनी का दूध अमृत तुल्य, ऊँटपालकों को मिले उचित मूल्य: राज्‍यपाल ने उष्ट्र अनुसंधान केंद्र का किया अवलोकन Rajasthan News Portal देश
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Thar पोस्ट न्यूज बीकानेर। राज्यपाल श्री हरिभाऊ बागडे ने मंगलवार को भाकृअनुप-उष्ट्र अनुसंधान केन्द्र (एनआरसीसी) का अवलोकन किया।

राज्यपाल ने यहां के उष्ट्र संग्रहालय का भ्रमण किया। यहां ऊँटों की विविध नस्लों, ऊँटों के बहुआयामी उपयोग, ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य में ऊँटों के योगदान, उष्ट्र व्यवहार तथा लक्षण, उष्ट्र दुग्ध तथा उष्ट्र पर्यटन संबद्ध गतिविधियों की सामग्री का अवलोकन किया। श्री बागडे ने ऊँट के बाल, खाल व हड्डी से बने विभिन्न उत्पादों को देखा। इस दौरान राज्यपाल ने ऊंटनी के दूध से बनी लस्सी का स्वाद भी चखा। उन्होंने केन्द्र द्वारा ऊँटनी के दूध पाउडर की सराहना की। राज्यपाल ने उष्ट्र सवारी स्थल का भ्रमण किया तथा उष्ट्र पालकों से संवाद किया।

राज्यपाल ने कहा कि ऊँटनी का दूध अमृततुल्य है। ऊँट पालकों को इसका उचित मूल्य मिलना चाहिए। इसके माध्यम से उष्ट्र पालकों को संबल देने के साथ इस प्रजाति को बचाया जा सकता है।

राज्यपाल ने प्रदेश में ऊँटनी के दूध की आपूर्ति के बारे में जानकारी ली और कहा कि राजस्थान को-ऑपरेटिव डेयरी फेडरेशन के माध्यम से ऊँटनी के दूध को और अधिक बढ़ावा दिया जाना चाहिए, जिससे यह उपभोक्ताओं के लिए सुलभ हो सके। उन्होंने केन्द्र के अनुसंधान कार्यों के बारे में जाना और उष्ट्र संरक्षण व विकास के लिए वैज्ञानिकों को प्रोत्साहित किया।

महाराष्ट्र पशु एवं मत्स्य विज्ञान विश्वविद्यालय, नागपुर के कुलपति तथा एनआरसीसी के पूर्व निदेशक रहे डॉ एन.वी. पाटिल ने राज्यपाल को केंद्र की अनुसंधान उपलब्धियों एवं यहां रखे जाने वाले उष्ट्र समूह की संख्या व विभिन्न नस्लों की विशेषताओं आदि के बारे में जानकारी दी।

एनआरसीसी निदेशक डॉ. अनिल कुमार पूनिया ने केन्द्र की अनुसंधान उपलब्धियों की जानकारी दी और बताया कि एनआरसीसी, ऊँटों पर अनुसंधान करने वाला विश्‍व स्तरीय उत्कृष्ट संस्थान है। यहां ऊँटों के जनन, प्रजनन, पोषण, शरीर क्रिया विज्ञान, स्वास्थ्य सहित अन्य पहलुओं पर अनुसंधान किया जा रहा है। डॉ. पूनिया ने बताया कि अनुसंधान में पाया गया कि यह दूध मधुमेह, टी.बी., आटिज्म आदि रोगों के निदान में लाभदायक है।


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