
Thar पोस्ट। विश्व के प्रत्येक शहर की आबोहवा व वातावरण से अनेक खाद्य उत्पाद तैयार होते है। ये उत्पाद ही उस शहर के लोगों के स्वास्थ्य के लिए बेहतर माने जाते है। हम अपने बुजुर्गों से ये कहते सुनते है कि – ‘हमारे जमाने ये शुगर, ब्लड प्रेशर आदि रोग नहीं थे। यह बात सही भी है हमने अपने वातावरण व प्रकृति की तासीर के खिलाफ जाकर अपना आहार ही बदल लिया। नतीज़ा यह हुआ कि लगभग प्रत्येक घर में शुगर, ब्लड प्रेशर, हाइपर टेंशन, हृदय, कैंसर सहित अनेक रोग से लोग जूझ रहे है। 1964 से पहले भारत में गेहूं की खेती नहीं होती थी। गेहूं का चलन भोजन में नहीं था। गेहूं की कई वैराइटी भारत में मौजूद थीं. लेकिन इन किस्मों के तने काफी लंबे थे। 1965 में पाकिस्तान से युद्ध चल रहा था। अमेरिका भारत को धमकी दे रहा था कि अगर युद्ध नहीं रुका तो गेहूं नहीं मिलेगा. हम अमेरिका से गेहूं मांग रहे थे। बात करें उत्तर भारत की तो चाहे पंजाब हो या राजस्थान। सभी लोग मक्का, बाजरा से बनी रोटी व व्यंजनों का इस्तेमाल करते थे। तब मधुमेह व ब्लड प्रेशर, कैंसर आदि रोग ना के बराबर थे। नहर आने के बाद पानी की समस्या का समाधान हुआ। लेकिन पंजाब, हरियाणा व राजस्थान में गेहूं का ही उत्पादन बहुतायत में हुआ वो भी अधिक कीटनाशकों के साथ। यहां कि प्रकृति में तैयार होने वाले प्रोडक्ट्स भुला दिए गए। कल्पना करें कि यदि बंगाल के लोगों को केवल बाजरे की रोटी खिलाई जाए और राजस्थान के लोगों के लिए चावल अनिवार्य कर दिया जाए तो क्या होगा? दोनों ही बातें वातावरण के खिलाफ है। दोनों ही प्रान्तों में रोगी बढ़ जाएंगे। इसलिए मेहरबानी कर हमारे शहर की प्रकृति को समझने का प्रयास करें। यदि बीकानेर के क्लाइमेट में बेहतरीन भुजिया तैयार होता है तो यह होता है। ऐसा भुजिया अन्य किसी प्रान्त में तैयार नहीं होता। यहां का क्लाइमेट बाजरा, सांगरी, केर, ग्वारपाठा, देशी फली राजस्थानी ककड़ी आदि के लिए बेहतर है। सभी स्वस्थ्ययुक्त है। अभी भी समय है यह है उपाय : राजस्थान में वरदान है बाजरा। डायबिटीज के मरीज हैं और जो नहीं है वो भी बाजरे की रोटी का सेवन जरूर करें इससे ब्लड शुगर कंट्रोल में रहेगा। इसमें फाइबर की भी मात्रा होती है जो कब्ज से छुटकारा दिलाती है। इस लिहाज से बाजरे को रोटी का सेवन करना शुरू कर देना चाहिए। इसमें पाए जाने वाले पोषक तत्व स्किन की झुर्रियों को कम करते हैं और चेहरे पर चमक लाने का काम करते हैं। यह आपके स्किन में कसावट पैदा करते हैं. इसके नियमित सेवन करने से एजिंग साइन से भी बचा जा सकता है। आहार विशषज्ञों के अनुसार इसमें प्राकृतिक रूप से एंटीऑक्सीडेंट्स, डाइट्री फाइबर, प्रोटीन और विटामिन पाया जाता है. इसके अलावा आयरन, जिंक, विटामिन बी3, विटामिन बी6 और विटामिन बी9 प्रचुर मात्रा में होता है। हाइपरटेंशन के शिकार हैं तो इसका सेवन करना शुरू कर दीजिए. यह बहुत फायदेमंद साबित होता है। इसमें मैग्नीशियम पाया जाता है आप गेहूं की जगह चाहें तो इसका सेवन करना शुरू कर दीजिए। खराब कोलेस्ट्रॉल आपके शरीर में इकट्ठा ना हो तो इसका सेवन करना शुरू कर दीजिए. वहीं जिनके शरीर में बैड कोलेस्ट्रॉल बढ़ा हुआ है उन्हें तो इसे जितनी जल्दी हो खाना शुरू कर देना चाहिए। सर्दी के मौसम में आपके शरीर को बाजरे की रोटी गरम रखती है. इससे आपको सर्दी-जुकाम जैसी एलर्जी नहीं होती है। वर्तमान में पैकिंग आटे में मिलावट होती है इससे भी छुटकारा मिलेगा। खाद्य पदार्थों में मिलावट से अनेक रोग हो रहे हैं कृपया कर अपने अपने शहर की मिट्टी व वातावरण को समझने का प्रयास करें। यदि आप इसे नहीं समझते है तो शुगर की गोलियां, इंजेक्शन, कैंसर की थेरेपी, हॄदय ब्लड् प्रेशर की दवा के लिए स्वयं को तैयार रखें।