Thar पोस्ट (जितेंद्र व्यास)। मायानगरी यानि मुबई में अभिनेता आशीष विद्यार्थी ने करीब 60 साल की उम्र में फिर से विवाह किया है तो धोरों की नगरी बीकानेर में एक नामचीन शख्स ने 60 साल की उम्र में फिर से शादी कर ली। कहा जा सकता है कि यह उनका निजी जीवन है। भारत मे बदलाव की यह विषैली बयार महानगरों से लेकर गांव-गाँव पहुंच चुकी है। इससे परिवार बिखर रहे है। रिश्तों की नींव खोखली हो चली है। व्यक्ति अकेला जीवन जीने की तरफ बढ़ रहा है। मज़े की बात यह है कि प्रत्येक व्यक्ति मूकदर्शक बना हुआ है केवल घटित को देख रहा है। बदलते परिवेश समाज में केवल यही आपाधापी चल रही है। इस वृत्ति से व्यक्ति अकेलेपन का शिकार हो रहा है। यह सच्चाई है कि देश की बड़ी अस्पतालों के मानसिक रोग विभाग में पढ़े लिखे लोग, मानसिक तनाव, अवसाद डिप्रेशन का इलाज करवा रहे है। यह संख्या निरंतर बढ़ रही है। व्यक्ति का जीवन कुछ ऐसा हो चला है कि मानों वह एक सुविधायुक्त रेलगाड़ी के डिब्बे में कैद हो। आस-पास क्या चल रहा है कोई मतलब नहीं। इसका असर इतना गहरा हुआ है कि कुछ माह के बच्चो को नानी-दादी की लोरियां, कहानी रास नहीं आती। इन सबका असर सामाजिक ताने-बाने पर पड़ा है और वह बिखरता जा रहा है। खास बात तो यह है कि इससे भारत मे धर्म व जातियों में बंटा प्रत्येक समाज जूझ रहा है। देश के न्यायालयों में तलाक, लुटेरी दुल्हन आदि आपराधिक मामलों की फाइलों की संख्या बढ़ रही है। हालात तो इस कदर बदल चुके हैं कि किसी भी व्यक्ति को किसी पर विश्वास भी नहीं रहा। बता दे कि पैसे से बहुत कुछ खरीदा जा सकता है लेकिन परिवार तथा इसमे प्रेम, आपसी अपनत्व, खुशियों को नहीं खरीदा जा सकता। बदलाव कुछ इस कदर हो चुका है कि भारतीय समाज मे 27 से 40 वर्ष की आयु के बीच अविवाहित युवक-युवतियों की लाखों की संख्या में फौज तैयार हो चुकी है ये छोटी मोटी नॉकरी कर जीवन बसर कर रहे है। यह वह पीढ़ी है जो पुष्पा फ़िल्म देख कर तो ताली बजाती है लेकिन इनके अंदर का पुष्पा कभी का मर चुका है। अंदर से इतने गिर चुके है खोखले हो चुके है कि कोई भी अपराध करते समय अपने परिवार के बुजुर्ग, बच्चों का भी ख्याल नहीं करते, कि उनका क्या होगा ? समाज मे अपराधों का ग्राफ तेजी से बढ़ रहा है। दिल्ली, उत्तर प्रदेश, मुम्बई, राजस्थान में एक जैसे हालात बने हुए है । क्रमश जारी…