Thar पोस्ट। एक अलमारी में 2.31 करोड़ व सोने के बिस्कुट मिलने के बाद इसकी गहराई से जांच पड़ताल की जा रही है। जयपुर के पुलिस कमिश्नर आनंद श्रीवास्तव, मुख्य सचिव उषा शर्मा, डीजीपी उमेश मिश्रा, एडीजी क्राइम दिनेश एमएन ने बीती देर रात प्रेस और मीडिया की वार्ता बुलाकर मामले की जांच करवाने और विशेष टीम गठित करने की बात कही है। लेकिन इसी मुद्दे पर सवाल खड़े हो गए हैं कि भ्रष्टाचार की यह रकम योजना भवन के बेसमेंट में किसने सूटकेस में भरकर रखी थी।

मिली जानकारी के मुताबिक दो अलमारियों की चाबी कर्मचारियों को काफी समय से नहीं मिल रही थी। जब पुलिस को बुलाकर अलमारियों को खोला गया। तो एक आलमारी में फाइलें मिलीं। जबकि दूसरी आलमारी में लैपटॉप बैग और ट्रॉली बैग मिला। जिसमें बड़ी मात्रा में यह नकदी और सोना बरामद हुआ। योजना भवन में कई डिपार्टमेंट संचालित होते हैं, लेकिन यह रकम किस डिपार्टमेंट के अफसर या कार्मिक ने आलमारी में छिपाई है, यह देर रात तक पता नहीं चल सका। क्योंकि कोई जिम्मेदारी लेने को तैयार नहीं हुआ। नेता प्रतिपक्ष राजेंद्र राठौड़ और बीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता कर्नल राज्यवर्द्धन सिंह राठौड़ ने प्रदेश की गहलोत सरकार को भ्रष्टाचार के मुद्दे पर जमकर घेरा है।राजस्थान विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष राजेंद्र राठौड़ ने ट्वीट कर कहा कि भ्रष्टाचार की गंगोत्री आखिरकार सचिवालय तक पहुंच ही गई। राजस्थान सचिवालय जहां मुख्यमंत्री अशोक गहलोत जी बैठकर शासन चलाते हैं। वहां करोड़ों की नकदी और सोना बरामद होना इस बात का प्रमाण है कि गहलोत सरकार भ्रष्टाचार के संरक्षणदाता की भूमिका में हैं। शुक्रवार को योजना भवन में IT डिपार्टमेंट के बेसमेंट में रखी 2 अलमारी को खोलने का प्रयास किया गया। उनमें लैपटॉप बैग और ट्रॉली वाला सूटकेस मिला। बैग में करेंसी नोट थे। तो इसकी सूचना पुलिस को दी गई।  रिपोर्ट के अनुसार पुलिस मौके पर पहुँची, तो बैग में 2 करोड़ 31 लाख 49 हजार की रकम पाई गई। साथ में 1 किलो गोल्ड बिस्कुट मिला। 500 और 2000 रुपए के इंडियन करेंसी के नोट मिले। पुलिस ने एक विशेष टीम गठित की है, जो जांच करेगी कि ये पैसा किसका था ? पुलिस कमिश्नर आनंद श्रीवास्तव ने प्रेस से रूबरू होकर यह जानकारी दी है। ये अलमारी कौनसे डिपार्टमेंट की थी, इसकी बात की जांच चल रही है। क्योंकि कोई भी जिम्मेदारी नहीं ले रहा है। पुलिस ने करीब 7-8 लोगों को हिरासत में लिया है। इनमें ज्यादातर मेंटेनेंस स्टाफ और कर्मचारी हैं।मौके के सीसीटीवी फुटेज भी देखे जा रहे हैं। इस रकम और अलमारी की जिम्मेदारी लेने को कोई तैयार नहीं है।