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IMG 20230513 091209 केर-सांगरी पर भारी, बेमौसम की बारिश, अब ये हालात Rajasthan News Portal राजस्थान
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Thar पोस्ट। राजस्थान में जलवायु परिवर्तन का असर यहां की जलवायु पर हुआ है। ओइछले दिनों बेमौसम बारिश से खेजड़ी के पेड़ों में कीड़े लग गए हैं और हजार-पंद्रह सौ रुपये प्रति किलो तक बिकने वाली केर-सांगरी के भाव 3000 रुपये किलो तक पहुंच गए हैं. छोटे से छोटे होटलों और ढाबों में मौजूद रहने वाली केर-सांगरी अब थाली से दूर और दूर होती जा रही है. खेजड़ी को राजस्‍थान की संजीवनी माना जाता है. मरू प्रदेश में जहां पेड़-पौधे नहीं के बराबर होते हैं, वहां पर खेजड़ी न सिर्फ छाया देती है, बल्कि इस पर लगने वाली सांगरी सदियों से यहां के लोगों के खानपान का हिस्‍सा रही है. सांगरी पौष्टिक है और केर के साथ मिलाकर बनने वाली केर-सांगरी की सब्‍जी राजस्‍थानी पकवान का अहम हिस्‍सा है.  बेमौसम बारिश के कारण खेजड़ी में कीड़े लग रहे हैं. पश्चिमी राजस्‍थान में मार्च, अप्रैल और मई के महीनों में तीन गुना ज्‍यादा बारिश हुई. हवा में नमी के कारण कीड़े पनपने लगे हैं. अरीज रिसर्च जोन जोधपुर के डायरेक्‍टर एम आर बलोच के मुताबिक, इस बार सांगरी का उत्‍पादन 60-70 प्रतिशत तक कम हो गया है. कारण जलवायु परिवर्तन है. जहां गर्मी पड़नी थी, वहां पर बारिश के कारण ठंडक हो गई है. नमी के कारण खेजड़ी के प्राकृतिक दुश्‍मनों फंगस और कीच के पनपने के लिए अच्‍छी परिस्थितियां पैदा हो गईं, यह गर्मी में पहले मर जाते थे. नमी के कारण अधिक पनप गए।


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