Thar पोस्ट, न्यूज नई दिल्ली। देश मे लाये गए 8 चीतों का शिकार बनने के लिए मध्यप्रदेश के राजगढ़ वन मंडल से 181 चीतल कूनो भेजे गए है। इस फैसले से वन्यजीव रक्षा के लिए पहचान रखने वाला बिश्नोई समाज आहत है। समाज ने PM को लेटर लिखकर पूछा है- क्या यह कोई स्थापित तथ्य है कि चीता प्रकृति के लिए जरूरी है और चीतल नहीं।प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 17 सितंबर को श्योपुर एमपी के कूनो नेशनल पार्क में नामीबिया से लाए 8 चीतों को छोड़ा। राजगढ़ वन मंडल के वन परिक्षेत्र नरसिंहगढ़ के अधिकारी गौरव गुप्ता ने बताया कि वन क्षेत्र से 181 चीतल कूनो भेजे गए हैं। अखिल भारतीय बिश्नोई महासभा के अध्यक्ष देवेंद्र बुड़िया ने प्रधानमंत्री और वन मंत्री भूपेंद्र यादव को पत्र लिखकर चीतों को चीतल न परोसने की अपील की। देशभर में बिश्नोई समाज को राजनीतिक समाजिक संगठनों से जुड़े लोगों ने विरोध की मुहिम शुरू कर दी। अखिल भारतीय बिश्नोई महासभा, बीकानेर की ओर से एक ज्ञापन 18 सितंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम दिया। ज्ञापन में कहा गया है कि 17 सितंबर को श्योपुर एमपी के कूनो नेशनल पार्क में नामीबिया से लाए चीतों को भोजन के लिए राजगढ़ से भेजे गए चीतल परोसे गए। बिश्नोई समाज ने एतराज उठाया है। ज्ञापन में कहा है कि चीते शिकार कर सकें इसके लिए नेशनल पार्क के सीमित दायरे में चीतल छोड़े गए हैं। इससे बिश्नोई समाज आहत है। बिश्नोई समाज 500 साल से पर्यावरण, प्रकृति व वन्यजीवों की रक्षा के लिए गुरू जम्भेश्वर भगवान के दिए सिद्धांतों पर चल रहा है। हम दुनिया के एकमात्र समाज हैं जिन्होंने पेड़ों के लिए 363 लोगों का बलिदान दिया। कूनो की इस खबर से समाज दुखी है। समाज की संस्थाएं, संत जीवरक्षा समितियां, जीवरक्षा सभा व महासभा आहत हैं। वैज्ञानिक नजरिये से यह कोई स्थापित तथ्य नहीं है कि चीता प्रकृति के लिए जरूरी है और चीतल नहीं। निर्णय पर दोबारा विचार करें।