Thar पोस्ट, न्यूज।बीकानेर। एल एस कर्मा फाउण्डेशन की ओर से महिला दिवस मनाया गया। मुख्य अतिथि महापौर सुशीला कंवर,विशिष्ट अतिथि जिला उद्योग केन्द्र की महाप्रबंधक मंजू नैन गोदारा,महिला एवं बाल विकास की उपनिदेशक शारदा चौधरी, फ ाउण्डेशन की संरक्षक लक्ष्मीदेवी मंडा व शिवरी चौधरी ने मां सरस्वती के चित्र पर दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम की शुरूआत की। फाउण्डेशन की अध्यक्ष डॉ सुमन चौधरी ने अतिथियों का स्वागत करते हुए फाण्डेशन के उद्देश्यों पर प्रकाश डाला। उन्हो ंने बताया कि संस्था महिला सशक्तिकरण एवं पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में काम कर रही है। संस्था की ओर से पुराने कपड़ों से पांच हजार निर्मित थैले बनाकर प्रदर्शित किया गया और पॉलिथिन पर निर्भरता कम करने का संदेश दिया। अतिथियों ने महिलाओं को आत्मनिर्भर बनने के लिये प्रेरित किया। इस मौके पर महिला उत्थान व शिक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य करने वाली महिलाओं का सम्मान किया गया। समारोह में डॉ अनुपमा चौधरी,नीलम बेनीवाल,डॉ रितू थोरी,डॉ सुनीता मण्डा,डॉ प्रीति चौधरी,भाग्यश्री फालोदिया,जया जाखड़,कंचन जाखड़,नीलम चौहान सहित अनेक महिलाओं ने शिरक त की। संचालन डॉ मीनाक्षी चौधरी ने किया।

76 जोड़ों का किया सम्मान

Thar पोस्ट, बीकानेर। पुष्करणा ब्राह्मण समाज के पचास वर्ष पूर्व आयोजित सामूहिक विवाह (ओलंपिक सावे) में परिणय सूत्र में बंधने वाले 76 जोड़ों का सोमवार को रमक झमक की ओर से सम्मान किया गया।
सूरदासाणी बगीची में आयोजित कार्यक्रम के मुख्य अतिथि राज्य मानवाधिकार आयोग के अध्यक्ष श्री गोपालकृष्ण व्यास थे।
आयोग अध्यक्ष श्री व्यास ने कहा कि पुष्करणा समाज का सामूहिक सावा मितव्ययता और परंपराओं के संरक्षण के दृष्टिकोण से पूरे देश के लिए एक मिसाल है। समाज द्वारा सदियों से इस परंपरा का निर्वहन किया जा रहा है तथा इसे आगे बढ़ाने के लिए रमक झमक जैसी संस्थाएं सराहनीय कार्य कर रही हैं। श्री व्यास ने कहा कि ओलंपिक सावे के बाद भी रमक झमक संस्था द्वारा लगातार नवाचार करके दांपत्य जीवन के 50 वर्ष पूर्ण करने वाले जोड़ो को सम्मानित किया गया है। इससे युवा पीढ़ी में वरिष्ठ जनों के प्रति सम्मान की भावना होगी। उन्होंने कहा कि समाज के प्रबुद्ध लोग यह प्रयास करें, कि हमारी परंपराओं का मूल स्वरूप बना रहे। हम देखादेखी से दूर रहें और कम से कम खर्च में विवाह और अन्य कार्य करें।
प. जुगलकिशोर ओझा (पुजारी बाबा) ने कहा कि आज के प्रतिस्पर्धी दौर में में भी इसकी सादगी बनाए रखना बेहद जरूरी है। इसके लिए युवा पीढ़ी को आगे आना होगा। उन्होंने रमक झमक के संस्थापक स्व. छोटूलाल ओझा द्वारा परंपराओं के संरक्षण के लिए की गई पहल की सराहना की। कार्यक्रम संत भावनाथ महाराज के सान्निध्य में हुआ। उन्होंने संस्कृति और परम्पराओं को भावी पीढ़ी तक पहुंचाने की अपील की।
रमक झमक संस्था के अध्यक्ष प्रहलाद ओझा ‘भैरूं’ ने बताया कि पिछले लगभग तीन दशक से रमक झमक ओलंपिक सावे के दौरान परंपराओं का निर्वहन करने वालों को प्रोत्साहित करता आया है। इनमें विष्णु वेश में जाने वाले दूल्हों के सम्मान, विवाह सामग्री निशुल्क उपलब्ध करवाना आदि शामिल हैं। इससे पहले अतिथियों ने 50 वर्ष पूर्ण करने वाले युगल का सम्मान किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता रतना महाराज ने की। कार्यक्रम में सभी दम्पतियों के आरोग्य के लिये संस्था की ओर से पण्डित आशीष भादाणी के आचार्यत्व में रुद्राभिषेक किया गया। सभी दम्पतियों ने भगवान शिव को बिल्व पत्र अर्पित किए। अभिनंदन पत्र का वाचन एडवोकेट अजय व्यास ने किया।
इस दौरान महेश व्यास, प्रेम रतन छंगाणी, गौरीशंकर देराश्री जुगल पुरोहित आदि लोग मौजूद रहे। बाबू कटपीस ने कट कट कर गीत सुनाया व राधे ओझा ने आभार व्यक्त किया। संचालन कवि गीतकार बाबूलाल छंगाणी ने किया। सम्मानित दम्पतियों की ओर से कुछ युगल ने 50 साल में बदलते विवाह परम्परा व उसके स्वरूप पर प्रकाश डाला ।इस दौरान मानवाधिकार आयोग अध्यक्ष श्री व्यास ने ‘केशरिया बालम आओ नी पधारो म्हारे देश’ गाया तो हॉल तालियों से गूंज उठा।

Thar पोस्ट।बीकानेर/ साहित्य अकादेमी नई दिल्ली के तत्वावधान में सात दिवसीय साहित्योत्सव 10-15 मार्च तक दिल्ली में आयोजित किया जाएगा । साहित्योत्सव कार्यक्रम के अन्तर्गत पूर्वोत्तरी कार्यक्रम में हिन्दी-राजस्थानी भाषा के वरिष्ठ साहित्यकार कवि – कथाकार राजेन्द्र जोशी राजस्थानी कहानी का वाचन करेंगे ।साहित्य अकादेमी नई दिल्ली के सचिव के. श्रीनिवास राव ने बताया कि उत्तर-पूर्वी और उत्तर लेखक सम्मिलन रवीन्द्र भवन परिसर में आयोजित होगा, उन्होंने बताया कि पूर्वोत्तरी कार्यक्रम का उद्घाटन प्रख्यात कवि अरुण कमल करेंगे तथा दूसरे सत्र में बंग्ला, हिन्दी, पंजाबी एवं राजस्थानी भाषा के साहित्यकार कहानी-पाठ करेंगे, राव ने बताया कि इस सत्र में राजस्थानी साहित्यकार राजेन्द्र जोशी राजस्थानी कहानी का वाचन करेंगे ।उल्लेखनीय है कि जोशी की अनेक पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी है जिसमें राजस्थानी कहानी संग्रह “जुम्मै री नमाज” पाठकों के बीच चर्चित कहानी-संग्रह है। जोशी के अगाड़ी कहानी संग्रह एवं कद आवैला खरूंट कविता संग्रह पाठकों में लोकप्रिय रही है ।